रायबरेली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रायबरेली (Raebareli) में लगे कांग्रेस (Congress) के होर्डिंग्स ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। शहर में लगाए गए पोस्टरों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- “200 सीट, हक है हमारा” और “यूपी को राहुल गांधी पर है भरोसा।” होर्डिंग्स में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी और इमरान मसूद की तस्वीरें लगाई गई हैं।
कांग्रेस के इस दावे ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि जिस पार्टी का उत्तर प्रदेश में विधानसभा आधार लगातार कमजोर होता गया, वह 403 सीटों वाले प्रदेश में 200 सीटों पर दावा किस दम पर कर रही है? आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस आंकड़ों से सबक लेने के बजाय सीधे सत्ता में वापसी का सपना दिखा रही है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पिछले विधानसभा प्रदर्शन पर नजर डालें तो पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर हुई है. 2007 में कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थीं। 2012 में पार्टी का आंकड़ा बढ़कर 28 सीटों तक पहुंचा, लेकिन 2017 में कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर सिमट गई. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को पूरे प्रदेश में महज 2 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर करीब 2.39 प्रतिशत रहा। यानी जिस कांग्रेस के पास 2012 में 28 विधायक थे, वह दस साल बाद केवल दो विधायकों तक रह गई। 2017 में पार्टी ने 114 सीटों पर चुनाव लड़कर 7 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में करीब पूरे प्रदेश में उम्मीदवार उतारने के बावजूद जीत सिर्फ दो सीटों पर मिली।
रायबरेली को गांधी परिवार का मजबूत राजनीतिक किला माना जाता है, लेकिन विधानसभा चुनाव के आंकड़े कांग्रेस के लिए राहत देने वाले नहीं हैं। 2017 में रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस की अदिति सिंह ने 1,28,319 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्हें करीब 61.9 प्रतिशत वोट मिले थे. 2022 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अदिति सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं और 1,02,429 वोट हासिल कर जीत गईं। समाजवादी पार्टी के राम प्रताप यादव को 95,254 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मनीष चौहान केवल 14,954 वोटों पर सिमट गए। कांग्रेस को करीब 6.56 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी तीसरे स्थान पर रही।

