फर्रुखाबाद। अर्रापहाड़पुर स्थित सब्जी मंडी में अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मंडी परिसर में 50 से अधिक अवैध दुकानें बना ली गई हैं। इन दुकानों को हटाने के लिए मंडी सचिव की ओर से लाल निशान लगाकर नोटिस चस्पा किए गए हैं। दुकानदारों को दुकानें हटाने के लिए सात दिन की मोहलत दी गई थी। समय सीमा पूरी होने वाली है, लेकिन अभी तक एक भी अवैध दुकान नहीं हटाई गई है। ऐसे में मंडी प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मऊदरवाजा थाना क्षेत्र स्थित इस सब्जी मंडी में कई स्थानों पर अवैध कब्जे किए गए हैं। पश्चिमी गेट से लेकर मंडी के अंतिम छोर तक लोहे और लकड़ी की स्थायी दुकानें खड़ी कर दी गई हैं। इन दुकानों को इस तरह बनाया गया है कि अतिक्रमण ने धीरे-धीरे स्थायी रूप ले लिया है। आरोप है कि इन अवैध दुकानों को बनवाने में मंडी से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों की भी भूमिका रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अतिक्रमण के कारण दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जी लेकर आने वाले किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में पंजीकृत फर्मों के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है। सब्जी खरीदने के लिए ग्रामीण इलाकों से आने वाले दुकानदारों को अपने वाहन खड़े करने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। मंडी परिसर में रास्तों पर अवैध दुकानों का कब्जा होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है।
बताया जा रहा है कि दोपहर में मंडी का कारोबार बंद होने के बाद अवैध दुकानें संचालित करने वाले कारोबारी उनमें ताले लगाकर चले जाते हैं। लोहे और लकड़ी से बनी इन दुकानों को स्थायी रूप दे दिया गया है। अवैध दुकानें बनवाने वालों में राजनीतिक पहुंच रखने वाले प्रभावशाली कारोबारियों के शामिल होने की भी चर्चा है। इसी वजह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मंडी सचिव की ओर से दुकानों पर लाल निशान लगाकर नोटिस चस्पा किए जाने के बावजूद अब तक किसी दुकान को नहीं हटाया जाना प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। सात दिन की दी गई मोहलत पूरी होने के करीब है। ऐसे में अब देखना होगा कि समय सीमा समाप्त होने के बाद मंडी प्रशासन स्वयं अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है या फिर अवैध दुकानों का कब्जा इसी तरह बना रहता है। किसानों और व्यापारियों ने मंडी परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।




