फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। चेहरे पर गंभीर घाव के चलते करीब 15 दिन पहले लावारिस हालत में भर्ती कराए गए 40 वर्षीय युवक सुरेश की मौत के बाद भी अस्पताल के कर्मचारियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। डॉक्टर द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद उसका शव करीब सवा घंटे तक वार्ड के फर्श पर पड़ा रहा। इस दौरान शव को मॉर्चरी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने में भी लापरवाही बरती गई। युवक के हाथ-पैर अकड़े हुए थे और चेहरे सहित शरीर पर चींटियों के झुंड दिखाई दे रहे थे। इससे उसकी मौत शनिवार रात में ही होने की आशंका जताई जा रही है। चेहरे पर गहरे घाव और शरीर की स्थिति को देखते हुए भर्ती रहने के दौरान नियमित ड्रेसिंग और देखभाल नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के मुरहास कन्हैया गांव निवासी सुरेश (40) को 14 अक्टूबर की शाम 4 बजकर 56 मिनट पर चेहरे पर गंभीर घाव की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एंबुलेंस के ईएमटी अरविंद यादव उसे लेकर पहुंचे थे। इसके बाद उसे लावारिस वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। रविवार सुबह सूचना मिलने पर इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉ. अमन कुमार ने सुबह 9 बजकर 6 मिनट पर सुरेश की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने वार्ड में मौजूद स्टाफ नर्स मनोरमा को शव मॉर्चरी में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। साथ ही मरीज की फाइल नीचे भेजकर पुलिस को सूचना देने की प्रक्रिया पूरी कराने को कहा। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित स्टाफ ने न तो शव को तत्काल मॉर्चरी पहुंचाया और न ही पुलिस सूचना तैयार कराने के लिए फाइल नीचे भेजी।
सुबह करीब 10 बजे तक शव वार्ड में ही पड़ा रहा। इसी दौरान लावारिस मरीज की मौत की सूचना पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मौके का जायजा लिया तो सुरेश का शव फर्श पर पड़ा मिला। उसके हाथ-पैर अकड़े हुए थे। चेहरे और शरीर पर सैकड़ों चींटियां दिखाई दे रही थीं। शव की स्थिति देखकर आशंका जताई गई कि उसकी मौत कई घंटे पहले हो चुकी थी। इससे रात की ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शरीर पर गंभीर घाव होने के बावजूद नियमित ड्रेसिंग और देखभाल हुई या नहीं, इसकी जांच की जरूरत है।
मामले की जानकारी मिलने पर ईएमओ डॉ. अमन कुमार वार्ड पहुंचे और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स से नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि जब सुबह नौ बजे ही मरीज को मृत घोषित कर दिया गया था तो अब तक शव को मॉर्चरी क्यों नहीं भेजा गया। ईएमओ ने पूरे मामले की जानकारी सीएमएस को व्हाट्सऐप पर फोटो सहित भेजी। इसके बाद अस्पताल का स्टाफ हरकत में आया और सुबह करीब 10 बजकर 15 मिनट पर वार्डबॉय ने शव को मॉर्चरी में रखवाया। पुलिस को भी सूचना भेजी गई।
इस घटना ने अस्पताल में लावारिस मरीजों की देखभाल, साफ-सफाई और कर्मचारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 15 दिनों तक भर्ती रहे मरीज की नियमित देखभाल और घावों की ड्रेसिंग किस तरह की गई? डॉक्टर के मृत घोषित करने के बाद भी शव को समय से मॉर्चरी क्यों नहीं पहुंचाया गया? क्या रात की ड्यूटी के दौरान मरीज की हालत पर किसी ने ध्यान दिया था? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। अस्पताल प्रशासन के लिए जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।




