कानपुर, उत्तर प्रदेश। शहर में पुलिस थानों की कार्यशैली और शिकायतों पर सुनवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बीते शनिवार को आयोजित थाना दिवस के दौरान जिले के 52 थानों में कुल मिलाकर केवल 46 शिकायतें पहुंचीं। यह आंकड़ा थाना दिवस में लोगों की कम भागीदारी की ओर इशारा करता है। वहीं, फरियादियों के पुलिस आयुक्त (सीपी) कार्यालय पहुंचने की स्थिति ने थानों में शिकायत निस्तारण की व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है।
शासन की ओर से थाना दिवस आयोजित करने का उद्देश्य लोगों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखने का अवसर देना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इसके तहत पुलिस अधिकारियों को फरियादियों की शिकायतें सुनकर उचित कार्रवाई करनी होती है। लेकिन थानों में शिकायतों की कम संख्या से इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस की कथित टालमटोल नीति और थानों की कार्यशैली से नाराज कुछ फरियादी अपनी शिकायतें लेकर सीधे पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंच रहे हैं। लोगों की अपेक्षा रहती है कि उनकी शिकायत पर तत्काल सुनवाई हो और उन्हें बार-बार अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें। हालांकि, केवल शिकायतों की संख्या के आधार पर जनता के भरोसे में गिरावट का निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस स्थिति में पुलिस प्रशासन के सामने थाना दिवस को अधिक प्रभावी बनाने और लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती है। शिकायतों की गंभीरता से सुनवाई, समय पर कार्रवाई और फरियादियों को उनकी शिकायत की प्रगति की जानकारी देना जरूरी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस अधिकारी थाना दिवस की व्यवस्था में सुधार और शिकायतों के निस्तारण को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

