लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में जुट गई है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने की दिशा में गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बसपा आगामी 6 दिसंबर को राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है। इस समारोह में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी शामिल होंगी।

पार्टी की ओर से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर होगा। इसे आगामी चुनावों से पहले बसपा के संगठनात्मक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को तैयारियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पार्टी नेतृत्व कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

इस कार्यक्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती की मौजूदगी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के प्रदेशभर के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। राजनीतिक जानकारों की नजर भी इस आयोजन पर रहेगी, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के लिए अपना संगठन मजबूत करना और अपने पारंपरिक जनाधार को एकजुट रखना महत्वपूर्ण चुनौती है।

इससे पहले पार्टी मुख्यालय में आयोजित बैठक में मायावती ने संगठन के पदाधिकारियों को चुनावी तैयारियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, अच्छे और योग्य उम्मीदवारों के चयन तथा पार्टी के वोटों की एकजुटता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। मायावती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करके ही उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाई जा सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया।

बैठक के दौरान मायावती ने चुनाव में बाहुबल और धनबल के इस्तेमाल तथा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से बसपा के वोटों को प्रभावित करने की कोशिशें होती रही हैं। उन्होंने ईवीएम से मतदान की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया। मायावती के अनुसार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा का अपना अलग राजनीतिक आधार रहा है। पार्टी अब एक बार फिर अपने संगठन को सक्रिय करने, बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करने में जुटी है। 6 दिसंबर का लखनऊ कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मायावती इस मंच से कार्यकर्ताओं को क्या राजनीतिक संदेश देती हैं और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति के कौन-कौन से पहलू सामने आते हैं।