- राम मंदिर दर्शन के कार्यक्रम ने बढ़ाई सियासी हलचल

- धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक गलियारों में भी दौरे की चर्चा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अयोध्या जाएंगे। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन करेंगे। उनके प्रस्तावित दौरे की खबर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद देश की राजनीति में राम मंदिर और रामलला के दर्शन का विषय लगातार चर्चा के केंद्र में रहा है। ऐसे में प्रमुख विपक्षी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का परिवार के साथ अयोध्या पहुंचना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पत्नी डिंपल, बेटा और बेटी भी रहेंगे साथ, हनुमानगढ़ी में भी टेकेंगे मत्था

सपा नेता एवं पूर्व मंत्री पवन पांडे ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की जानकारी दी है। उनके मुताबिक अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव, बेटा तथा बेटी भी मौजूद रहेंगे। वह राम मंदिर में दर्शन के बाद हनुमानगढ़ी जाएंगे। इस दौरान साधु-संतों और महंतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद भी लेंगे। पवन पांडे ने बताया कि अखिलेश यादव अयोध्या में पूरा दिन बिताएंगे।

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय अखिलेश यादव का अयोध्या जाना चर्चा का विषय बना था। उन्होंने उस समय प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के बजाय बाद में परिवार के साथ दर्शन करने की बात कही थी। जुलाई 2026 में उन्होंने कहा था कि इटावा में केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद वह राम मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे।

अक्टूबर 2026 में अयोध्या में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भी अखिलेश यादव ने राम मंदिर दर्शन की इच्छा दोहराई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी थी। इसके बाद अब 12 दिसंबर का कार्यक्रम सामने आया है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अयोध्या का राजनीतिक महत्व लगातार बना हुआ है। राम मंदिर भाजपा की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के सामाजिक समीकरण के साथ अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है।