लखनऊ। उत्तर प्रदेश की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी-पैक्स) के कर्मचारियों ने वर्षों से वेतन नहीं मिलने और लगातार बढ़ते आर्थिक संकट का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। एम-पैक्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष शैलेन्द्र तिवारी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की अपील की है। कर्मचारी 22 अक्टूबर से लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि पिछले आठ से दस वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
संघ का आरोप है कि आंदोलन शुरू होने के बाद प्रदेश के सभी 75 जिलों में कर्मचारियों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है। आंदोलन में हिस्सा लेने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कुछ कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
संघ के मुताबिक, कर्मचारी वर्ष 2018 से नियमित वेतन भुगतान की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए। सात सितंबर को मांग-पत्र देने के बाद 21 सितंबर, पांच अक्टूबर और 29 अक्टूबर को विभागीय स्तर पर वार्ता भी हुई, लेकिन वेतन भुगतान की व्यवस्था को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। कर्मचारियों का आरोप है कि हर बार आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ।
कर्मचारियों ने सहकारी विभाग में वेतन भुगतान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभाग के अन्य कर्मचारियों को राजकीय कोष से वेतन दिया जाता है, जबकि बी-पैक्स कर्मचारियों को अधिनियम का हवाला देकर नियमित वेतन व्यवस्था से अलग रखा गया है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे वर्षों तक काम लिया जा रहा है तो उन्हें समय पर वेतन देने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।
राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कर्मचारियों ने सात प्रमुख मांगों पर हस्तक्षेप की अपील की है। इनमें लंबित वेतन का तत्काल भुगतान, नियमित वेतन व्यवस्था लागू करना, आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की समीक्षा, नोटिस व निलंबन की निष्पक्ष जांच तथा मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न रोकने की मांग शामिल है। इसके अलावा संबंधित अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने और समस्या के स्थायी समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने की भी अपील की गई है।



