लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। सरोजनी नगर के अमौसी स्थित इंडियन ऑयल के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में मंगलवार सुबह छह बजे से सिलेंडरों की उठान बंद है। अपनी मांगों को लेकर 15 गैस ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल शुरू करते हुए 206 ट्रकों का चक्का जाम कर दिया है। ट्रांसपोर्टरों के काम बंद करने से प्लांट से गैस एजेंसियों तक सिलेंडरों की ढुलाई प्रभावित हो गई है। ट्रांसपोर्टरों ने साफ कहा है कि जब तक उन्हें उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक वे सिलेंडरों की उठान दोबारा शुरू नहीं करेंगे।
हड़ताल पर गए ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि वर्ष 2023 में हुए टेंडर के दौरान उन्हें 192 गैस एजेंसियों तक सिलेंडर पहुंचाने का काम दिया गया था, लेकिन अब काम में कटौती की जा रही है। उनका कहना है कि टेंडर के समय जिन शर्तों और आश्वासनों के आधार पर उन्होंने परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी ली थी, उनका पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने काम घटाने और पहले किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू किया है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि परिवहन का काम मिलने के बाद उन्होंने अपने स्तर पर ट्रकों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की। इस काम में उनकी बड़ी पूंजी लगी हुई है और वाहन, चालक तथा दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ऐसे में यदि निर्धारित काम में कटौती की जाती है तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उनका आरोप है कि इस संबंध में पहले भी अपनी बात रखी गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी के विरोध में सभी संबंधित ट्रांसपोर्टरों ने एक साथ काम बंद करने का फैसला किया।
मंगलवार सुबह छह बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के चलते अमौसी प्लांट से इंडेन गैस सिलेंडरों की उठान प्रभावित है। 15 ट्रांसपोर्टरों के 206 ट्रकों के खड़े हो जाने से प्लांट से गैस एजेंसियों तक होने वाली ढुलाई पर असर पड़ा है। यदि हड़ताल लंबी चलती है तो गैस एजेंसियों के स्टॉक और उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचने की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन-किन एजेंसियों के पास कितना स्टॉक बचा है और उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में कितनी देरी हो सकती है।
ट्रांसपोर्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने से इनकार किया है। उनका कहना है कि मौखिक बातचीत या आश्वासन से अब समस्या का समाधान नहीं होगा। वे चाहते हैं कि उनकी मांगों और परिवहन से जुड़ी शर्तों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से लिखित सहमति दी जाए। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वे ट्रकों को दोबारा काम पर लगाने और सिलेंडरों की उठान शुरू करने पर विचार करेंगे।
इस हड़ताल के कारण अब इंडियन ऑयल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के बीच बातचीत तथा समाधान की स्थिति पर नजर बनी हुई है। यदि जल्द सहमति नहीं बनती है तो गैस वितरण व्यवस्था पर इसका असर बढ़ सकता है। फिलहाल अमौसी स्थित बॉटलिंग प्लांट से सिलेंडरों की नियमित उठान ठप रहने के कारण गैस एजेंसियों तक आपूर्ति प्रभावित है।



