लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के कैसरबाग बस डिपो स्थित कार्यशाला में रविवार सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब कथित प्रताड़ना और वेतन में देरी से नाराज चालक-परिचालकों ने आत्मदाह का प्रयास किया। कर्मचारियों के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों और स्टाफ ने तत्काल हस्तक्षेप कर उन्हें बचा लिया। घटना के बाद कार्यशाला परिसर में तनाव का माहौल बन गया और कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई।

कर्मचारियों ने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) सतीश पाल पर परेशान करने और कथित रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों को रूट से हटाने सहित अन्य तरीकों से परेशान किया जा रहा है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने की समस्या भी बनी हुई है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लगातार समस्याओं के बावजूद उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

घटना के बाद कार्यशाला का गेट बंद कर दिया गया। परिसर में कर्मचारियों की भीड़ जुटने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं के समाधान और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में देरी और कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मामले में कर्मचारियों ने कैसरबाग कार्यशाला में 2710 लीटर डीजल के कथित घोटाले का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि इस मामले की जानकारी अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों ने डीजल के कथित घोटाले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। हालांकि, डीजल से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।

कर्मचारियों के अनुसार, संविदा कर्मियों के वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि वेतन जैसी बुनियादी समस्या के समाधान में देरी से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि वेतन भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित भुगतान जल्द कराया जाए।

कैसरबाग बस डिपो में हुई इस घटना ने परिवहन निगम के कर्मचारियों की समस्याओं और कार्यस्थल पर शिकायतों के निस्तारण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित प्रताड़ना के आरोपों की पड़ताल हो और डीजल के कथित घोटाले की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।