जेल परिसर की पुरानी कॉलोनियां तोड़ने के बाद जमा हुआ था मलबा, जेसीबी चालक कैमरे देखकर मौके से भागा

उन्नाव। जिला कारागार परिसर में पुरानी सरकारी आवासीय कॉलोनियों को तोड़ने के बाद जमा हुए मलबे को कथित तौर पर बिना अनुमति बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि परिसर में इकट्ठा मलबे की सैकड़ों ट्रॉलियां चोरी-छिपे बाहर निकालकर बेच दी गईं। मामले ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, जिला कारागार परिसर में जेल प्रशासन की पुरानी कॉलोनियों को तोड़े जाने के बाद बड़ी मात्रा में ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री का मलबा एकत्र हुआ था। आरोप है कि इसी सरकारी मलबे को बिना अनुमति बाहर निकालकर बेचने का खेल किया गया। हालांकि, अब तक कितनी ट्रॉलियां मलबा बाहर ले जाया गया और उससे कितनी रकम प्राप्त हुई, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

सूत्रों के हवाले से जेल प्रशासन के कुछ लोगों पर मोटी रकम लेकर मलबा बेचने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी अधिकारी की संलिप्तता अभी प्रमाणित नहीं है। सरकारी संपत्ति की बिक्री के लिए अनुमति और संबंधित अभिलेखों की जांच किए जाने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में जेल अधीक्षक नीरज देव ने जानकारी होने से इनकार किया है। उनके इस बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि जेल परिसर से सरकारी मलबा बाहर निकाला गया, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं हुई और इसकी निगरानी की व्यवस्था कैसी थी।

बताया जा रहा है कि मलबा उठाने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा था। परिसर में लगे कैमरों की ओर ध्यान जाने पर जेसीबी चालक के मौके से फरार होने की बात भी सामने आई है।