गांव राजेपुर, जरारी, भड़ौसा, पतौंजा, बंथलशाहपुर, जहांगीरपुर मुस्लिम बाहुल्य खाकी और दलालों के निशाने पर
=राजनैतिक संरक्षण पाये शातिर अति उल्लाह खां प्रतिबंधित मांस के लिए कराता सेटिंग
=सिपाही सोनू की रहनुमाई चर्चा का केन्द्र
=थाना क्षेत्र के निकटवर्ती गांवों में सरे आम दिन और रात सजते जुंए के फड और छलकते हैं जाम
यूथ इंडिया, फर्रूखाबाद
गालिब तुम्हारी क्या औकात जब साहब बहादुर और पहरेदार हमारे हैं सरकार........कुछ ऐसा ही नजारा थाना क्षेत्र जहानगंज में इन दिनों बर्दी दलाल मीडिया और शातिरों की जुगलबंदी के बाद आबाद हो रहा है। जश्र-ए-दिल खुश अंदाज में यहां खाकी तो आबाद है ही, गुलशन के रखवाले कुछ कलम नबीस भी ऐश-ए- मोहब्बत के अंदाज में जिंदगी गुलजार किये हैं। इनका निशाना मुस्लिम बाहुल्य आबादी पर इस लिए है क्योंकि हवा उडा दी कि सरकार तो राम की है रहीम का कोई रखवाला ही नही।
गांव राजेपुर विशेषकर जारारी और भड़ौसा फिर पतौंजा, बंथलशाहपुर, जहांगीरपुर और फिर कई ऐसे गांव जहां भोले-भाले लोग आपस में लड़ा दिये जाते, पंचायतें थाने के बाहर निपट जातीं।
बतातें है कि एक चर्चित कलम नवीस क......चतुर्वेदी और सिपाही की सेटिंग से साहब बहादुर फूले नही समाते खनन का सरगना युवक अनिरूद्ध चतुर्वेेदी इलाके भर में होने वाली खनन का जिम्मा संभालता, दिन में टै्रक्टर तो रात में मशीन फर्क इतना है कि मशीन की सुविधा का शुल्क दो गुना होता। दलालों का यह पूरा जत्था पूरे दिन और शाम का धुंधलका होते ही आंखों में बरेली का मोतीचूर सूरमा लगा निकल पडते हैं। गैंग के आकाओं को यह गुर्गे खनन की लोकेशन भेजते वह लोकेशन जिम्मेदारों तक पहुंचती और छापा पड़ता फिर तय होती दिहाड़ी और शुरू होता काला व्यापार।
थाने और दलाल मीडिया की शानदार गठजोड़ के बाद बागों और मुर्गा फारमों में बंद हो चुके जुंए के फड़ अब फिर आबाद हो चले हैं। जुआंरी दूरंदेश से यहां हाथ आजमाने आते। नई पीढी के कई युवा तुर्क जुएं के इस जाल में फंसते जा रहे। क्योकि जिम्मेदार मौन हैं उनकी न्योछाबर उन तक बेझिजक पहुंच ही रही।
सबसे चौकाने बाली बात तो यह है कि जिला प्रशासन तक को चुनौती देने वाला गैंग थाने के इन दलालों को संरक्षण देने लगा है। जिससे कोई तेज तर्रार थानेदार पहुंच भी जाये तो उसकी बैंड बजने में ज्यादा दिन नही लगते। एक उच्चाधिकारी ने इस सम्बंध में बताया कि वह मामले की गहराई तक जांच कराकर दोषियों को चिन्हित करेंगे।
पहले भिड़ैल अब नहर घुटा खुलेआम खनन का अड्डा
थाना जहानगंज क्षेत्र में एक दौर में भिडै़ल खनन माफियाओं के लिए सोने की खान माना जाता था। जिलाधिकारी डा० अंकुर लाठर की टेड़ी नजर के बाद अवैध खनन थमा लेकिन बंद नही हुआ। अब बहोरा गांव के निकट नहरघुटा खनन माफियाओं का केन्द्र है। बहोरिकपुर में टंकी के पास खुलेआम हुए खनन के अवशेष अभी मिटे नही है लेकिन कार्यवाही जरूर थम गई। क्योकि थाने का सिपाही सोनू और कानपुर से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित अखबार का चोला ओढ़ दलाल संरक्षण देने में जुट चुके है।
