शमशाबाद। दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस पर्व को लेकर शमशाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाजारों की रौनक देखते ही बन रही थी। गुरुवार को सुबह से ही बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी। मिठाई, खील-बताशे, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहनों की दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। व्यापारियों ने भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपने प्रतिष्ठानों को आकर्षक ढंग से सजाया था। बाजारों में चहल-पहल देखकर दुकानदारों के चेहरे खिल उठे। हालांकि गंगा कटरी क्षेत्र के किसानों और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए इस बार धनतेरस की खुशियां कुछ फीकी नजर आईं। हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और बारिश से हुए आर्थिक नुकसान ने उनकी त्योहार की तैयारियों पर असर डाला है।
धनतेरस हिंदू धर्म का प्रमुख धार्मिक पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर धन और आरोग्य की कामना करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन बर्तन, सोना-चांदी और झाड़ू सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। पर्व को लेकर कई दिनों से घरों और बाजारों में तैयारियां चल रही थीं। जैसे-जैसे त्योहार का समय नजदीक आता गया, वैसे-वैसे तैयारियां भी पूरी होती गईं।
धनतेरस की खरीदारी को लेकर गुरुवार को शमशाबाद के मुख्य बाजार में सुबह से ही रौनक दिखाई देने लगी थी। व्यापारियों ने अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को आकर्षक ढंग से सजाया था। कहीं मिठाइयों की दुकानें सजी थीं तो कहीं खील-बताशे, पेठा, लाई, खिलौने और पूजा सामग्री की बिक्री हो रही थी। बर्तनों की दुकानों पर भी ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ नजर आई। वहीं इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में लोग फ्रिज, वाशिंग मशीन, कूलर, पंखे और एलसीडी सहित अन्य घरेलू सामान खरीदते दिखाई दिए। वाहन शोरूम पर भी धनतेरस के मौके पर बाइक खरीदने के लिए ग्राहक पहुंचे।
सुबह करीब 11 बजे के बाद बाजार में खरीदारों की भीड़ और बढ़ गई। लोग परिवार के साथ जरूरत के सामान की खरीदारी करने पहुंचे। मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। परचून की दुकानों से पूजा-पाठ और प्रसाद की सामग्री खरीदी गई। बाजार में बढ़ती चहल-पहल देखकर व्यापारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद नजर आई। सुबह से लेकर दोपहर और फिर शाम तक बाजार में खरीदारी का सिलसिला जारी रहा।
धनतेरस के अवसर पर केवल शमशाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के कस्बों और ग्रामीण बाजारों में भी त्योहार की रौनक दिखाई दी। फैजबाग, रोशनाबाद, बेला सराय गजा, चिलसरा, मंझना, शकरुल्लापुर और किसरोली के बाजार भी खरीदारों से गुलजार रहे। जगह-जगह दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों को सजाकर ग्राहकों के स्वागत की तैयारी की थी। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे।
दूसरी ओर गंगा कटरी क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार त्योहार की खुशियां कुछ फीकी रहीं। हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के पानी से कई लोगों के घर-मकान, झुग्गी-झोपड़ियां और खेत-खलिहान प्रभावित हुए थे। फसलें बर्बाद होने से किसानों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कई परिवारों के सामने आज भी आर्थिक संकट बना हुआ है। ऐसे में धनतेरस जैसे बड़े पर्व पर भी उनके चेहरों पर पहले जैसी खुशी नजर नहीं आई।
किसानों के सामने अब रबी की फसलों की तैयारी की चुनौती भी खड़ी है। कहीं आलू की बुवाई की तैयारी चल रही है तो कहीं सरसों की बुवाई की जा रही है। इन कार्यों के लिए खाद की आवश्यकता है, लेकिन किसानों का आरोप है कि सरकारी संस्थानों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें निजी खाद केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जहां कथित तौर पर कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।



