कमालगंज, फर्रुखाबाद। शेखपुर स्थित मशहूर दरगाह अहसनी महमूदी में बुधवार को 127वां सालाना उर्स-ए-पाक अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के तीसरे और आखिरी दिन दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देश के विभिन्न शहरों से हजारों की तादाद में जायरीन पहुंचे। अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी कर मन्नती गागरें पेश कीं और मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली तथा अपनी मुरादों के लिए बारगाहे इलाही में दुआएं मांगीं।

उर्स के मौके पर दरगाह परिसर में सुबह से ही जायरीनों की आमद का सिलसिला जारी रहा। माहौल नारे तकबीर, दुरूद-ओ-सलाम और बुजुर्गान-ए-दीन की याद में होने वाली रूहानी महफिलों से गुलजार रहा। सुबह बा-जमात कुल शरीफ का आगाज हुआ। इस दौरान कुरआन ख्वानी की गई और बुजुर्गान-ए-दीन की तालीमात, उनकी जिंदगी और दीन के लिए दी गई खिदमात को याद किया गया।

कार्यक्रम में साहिबे सज्जादानशीन आमिर मियां की दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई। इसके बाद कव्वालों ने सूफियाना कलाम और मुबारकबाद के अशआर पेश किए। मुकद्दस रंग की रस्म में भी बड़ी तादाद में जायरीन ने शिरकत की। सूफियाना कलाम सुनकर अकीदतमंद झूमते नजर आए और दरगाह परिसर में रूहानी माहौल बना रहा।

इस अवसर पर साहिबे सज्जादानशीन आमिर मियां ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, मोहब्बत और खुशहाली के लिए खास दुआ कराई। उन्होंने समाज में एकता, इंसानियत और आपसी सौहार्द कायम रखने का पैगाम दिया। उर्स के समापन पर जायरीन के लिए लंगर का इंतजाम किया गया, जहां लोगों ने तबर्रुक हासिल किया।

उर्स में दूर-दराज से आए जायरीनों की मौजूदगी ने शेखपुर दरगाह की रूहानी और सूफियाना परंपरा के प्रति लोगों की अकीदत को जाहिर किया।