लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर और होर्डिंग (hoarding) के जरिए सियासी संदेश देने का सिलसिला तेज हो गया है। गुरुवार (5 नवंबर) को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर एक नई होर्डिंग लगाई गई। इस पर बड़े अक्षरों में लिखा है- ’27 में कृष्ण आएंगे’ होर्डिंग में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की तस्वीर के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाते हुए तस्वीर लगाई गई है। यह होर्डिंग सपा नेता मोहम्मद अजीम ने लगवाई है।
होर्डिंग में एक तरफ अखिलेश यादव की तस्वीर है तो दूसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण की भव्य छवि दिखाई गई है। इसके जरिए 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है। होर्डिंग ऐसे समय लगाई गई है, जब भगवान श्रीकृष्ण को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर विवाद चल रहा है।
सपा नेता मोहम्मद अजीम ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कथावाचक के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। अजीम का आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक मंच से भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा, उनके नाम और बांसुरी बजाने की शैली को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों कृष्ण भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
मोहम्मद अजीम ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों सनातन परंपरा के सर्वोच्च आराध्य हैं. दोनों के जीवन और लीलाओं का अपना महत्व है। किसी एक भगवान की महिमा बताने के लिए दूसरे भगवान के स्वरूप का उपहास करना गलत है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा, न्याय और अधर्म के खिलाफ धर्म की स्थापना के प्रतीक हैं। उनके व्यक्तित्व को मजाक या तुलना का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
सपा नेता ने कहा कि धार्मिक मंचों का इस्तेमाल समाज को जोड़ने और मर्यादा का संदेश देने के लिए होना चाहिए। देवी-देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणी कर विवाद पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई। फिलहाल सपा दफ्तर के बाहर लगी इस होर्डिंग को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।




