लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों से यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं। अखिलेश यादव ने यहां तक कहा कि ऐसे व्यक्ति को उत्तर प्रदेश में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को अब न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न ही अवध में। उनका कहना है कि न कोई सच्चा रघुवंशी उनका स्वागत करेगा और न ही कोई सच्चा यदुवंशी। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगाने की बात भी कही। अखिलेश यादव के मुताबिक, उस बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि पर प्रवेश वर्जित है।
सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धर्म और मजहब से जुड़े मामलों में किसी को भी ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिससे किसी समुदाय या समाज की भावनाएं आहत हों। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि ऐसी टिप्पणियों पर रोक नहीं लगी तो आगे दूसरे संप्रदायों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक और धार्मिक टकराव के बीच भगवान को क्यों लाया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपसी टकराव में धार्मिक आस्थाओं को शामिल करना उचित नहीं है।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंडित धीरेंद्र शास्त्री 17 नवंबर से प्रतापगढ़ में आयोजित होने वाली कथा में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश आने वाले हैं। इस कथा का आयोजन जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव की टिप्पणी को आगामी कथा और धीरेंद्र शास्त्री के उत्तर प्रदेश दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि अखिलेश यादव इससे पहले भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। ताजा बयान में उन्होंने एक बार फिर भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़ी आस्थाओं का सम्मान करने की बात उठाई है। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि धीरेंद्र शास्त्री और कथा आयोजकों की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।



