लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक महिला के साथ कथित बर्बरता का गंभीर मामला सामने आया है। खेसरहा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने ग्राम प्रधान और उसके सहयोगियों पर घर में घुसकर मारपीट करने, निर्वस्त्र करने, खंभे से बांधकर घंटों प्रताड़ित करने और यौन हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद जब उसे स्थानीय पुलिस और प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो वह शुक्रवार को राजधानी लखनऊ पहुंची और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई।

पीड़िता ने महिला आयोग और पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र में बताया कि उसके साथ हुई घटना बेहद गंभीर है। महिला का आरोप है कि गांव के प्रधान अहमद हुसैन और उनके सहयोगियों ने पुरानी रंजिश के चलते उसके घर में घुसकर उसके साथ मारपीट और अभद्रता की। आरोप है कि उसे निर्वस्त्र कर बाल पकड़कर घसीटा गया और एक खंभे से बांधकर करीब तीन घंटे तक लाठी-डंडों और लात-घूंसों से पीटा गया। पीड़िता के अनुसार, इस दौरान उसके साथ यौन हिंसा भी की गई और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़िता के मुताबिक, यह घटना 27 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब सात बजे की है। उस समय वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी। आरोप है कि तभी गांव के प्रधान अहमद हुसैन, गनी, शमी, असलम, बदरुन्निशा, रिजवाना खातून समेत करीब 20 से 25 लोग जबरन उसके घर में घुस आए। महिला का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ अभद्रता शुरू कर दी और विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान उसके कपड़े फाड़ दिए गए और बाल पकड़कर घसीटते हुए खंभे से बांध दिया गया। पीड़िता का कहना है कि लगभग तीन घंटे तक उसके साथ मारपीट की गई। जब गांव की कुछ महिलाएं बीच-बचाव करने पहुंचीं तो उन्हें भी कथित तौर पर धमकाया गया।

शिकायत में पीड़िता ने ग्राम प्रधान पर पहले भी प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि पूर्व में उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया था, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई थी। आरोप है कि बाद में उसे जबरन दवा खिलाकर गर्भपात करा दिया गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में इस बार की घटना के दौरान भी यौन हिंसा और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि जब उसने आरोपियों की बात मानने से इनकार किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़िता ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि घटना के बाद जब वह शिकायत लेकर खेसरहा थाने पहुंची तो उसकी मूल लिखित शिकायत को थानाध्यक्ष ने फाड़कर फेंक दिया। महिला के अनुसार, उसकी सहमति के बिना शिकायत में मनमाना विवरण दर्ज किया गया और उल्टा उसके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई। पीड़िता का कहना है कि उसका मेडिकल परीक्षण यानी एमएलसी भी नहीं कराया गया। ऐसे में उसे अपने शरीर पर आई चोटों के फोटो और वीडियो स्वयं सुरक्षित रखने पड़े।

महिला ने आरोप लगाया कि न्याय के लिए उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का भी दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। शिकायत के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को जब वह एसपी कार्यालय पहुंची तो वहां आरोपियों ने कथित तौर पर भीड़ जुटाकर मीडिया के सामने उसे जान से मारने की धमकियां दीं। पीड़िता का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह और उसका परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं।