बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly) में मंगलवार को भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकाली गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda)  ने इसका नेतृत्व किया। पदयात्रा से पहले आयोजित सभा में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

वहीं, केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने किसानों के मुद्दों और विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए। भाजपा की इस पदयात्रा में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि इसमें जनप्रतिनिधियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों समेत करीब 30 हजार लोगों ने हिस्सा लिया।

पदयात्रा से पहले लोगों को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष चुनाव में हार के बाद अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ता है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट चोरी का रिकॉर्ड बनाया है। नड्डा ने कांग्रेस पर बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट बनवाकर चुनाव जीतने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि अब ऐसे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं तो विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। कांग्रेस की स्थिति पर तंज कसते हुए उन्होंने ’70 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ वाली कहावत का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग के अध्यक्षों को राज्यपाल और दूसरे महत्वपूर्ण पद दिए जाते थे, लेकिन अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जेपी नड्डा ने एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एसआईआर का नाम लेकर राहुल गांधी ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। नड्डा ने कहा कि देश की व्यवस्था घुसपैठियों के हाथों में नहीं चल सकती। उनके मुताबिक, कांग्रेस को जनता लगातार नकार रही है और इस बार भी विपक्ष को चुनाव में जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को गुमराह करने वालों को करारा जवाब देना जरूरी है।

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं उठाने का आरोप लगाया। जयंत चौधरी ने कहा कि विपक्ष को किसानों की जरूरतों और उनकी परेशानियों की सही जानकारी नहीं है। उन्होंने इथेनॉल का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने जैसे मुद्दों पर भी बात करनी चाहिए।

उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि जब वह विपक्ष में थे, तब एक बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का मूल्य घोषित किया था। उसी दिन उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर इसकी जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव को उस समय गन्ने के मूल्य निर्धारण की जानकारी तक नहीं थी। जयंत चौधरी ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह किसानों के हितों की निगरानी करे और उनके मुद्दे सरकार के सामने उठाए।