लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में एसटीएफ की जांच के दौरान कई गंभीर आरोप और नए तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉ. रमीज पर मेडिकल की पढ़ाई कर रही हिंदू छात्राओं को अपने प्रभाव में लेकर उनकी पढ़ाई छुड़वाने का प्रयास करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि छात्राओं को अपने माता-पिता से मिलवाने के बाद कथित तौर पर उनका ब्रेनवॉश कराया जाता था। इसके लिए हुसैनाबाद स्थित फ्लैट पर अलग-अलग मौलानाओं से मुलाकात करवाने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच के मुताबिक, आरोपी डॉ. रमीज छात्राओं से नजदीकी बढ़ाने के बाद उन्हें अपने परिवार से दूर करने और धार्मिक गतिविधियों में बदलाव के लिए दबाव बनाने का प्रयास करता था। आरोप है कि छात्राओं को हिंदू त्योहार मनाने से रोका जाता था और बाद में उन्हें मुस्लिम त्योहार मनाने के लिए कहा जाता था। एसटीएफ की जांच में आगरा में मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का मामला भी सामने आया है, जिसके संबंध में आरोपी ने कथित तौर पर अपने पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा से मुलाकात कराई थी। आरोप है कि आरोपी के माता-पिता ने भी छात्रा को प्रभावित करने का प्रयास किया था।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि आरोपी छात्राओं को अपने प्रभाव में लेने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाता था। वह खुद को आधुनिक विचारों वाला व्यक्ति बताकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश करता था। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ शोषण किया जाता था। वर्ष 2012 की एक घटना के संबंध में आरोप है कि डांस प्रैक्टिस के बहाने एक छात्रा को फ्लैट पर बुलाया गया था। वहां आरोपी ने खुद को आधुनिक दिखाने के लिए शराब का सेवन किया और छात्रा पर भी शराब पीने का दबाव बनाया। इसके बाद छात्रा के साथ गलत व्यवहार किए जाने का आरोप है। अगले दिन शादी का भरोसा देकर संबंध बनाने और बाद में छात्रा की निजी तस्वीरें तथा वीडियो बनाने के भी गंभीर आरोप जांच में सामने आए हैं। बताया गया है कि आरोपी इन तस्वीरों और वीडियो को अपने साथियों को दिखाता था।
इस पूरे मामले में आरोपी के साथी शारिक खान की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। पुलिस के अनुसार, शारिक खान पर आगरा की महिला डॉक्टर के निकाह और कथित धर्मांतरण से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। वह मूल रूप से पीलीभीत जिले के न्योरिया का रहने वाला बताया गया है। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि शारिक और डॉ. रमीज के परिवारों के बीच पुराने संबंध थे और इसी वजह से दोनों की आपस में अच्छी दोस्ती थी। शारिक लंबे समय तक उत्तराखंड के खटीमा स्थित रमीज के घर पर भी रहा था।
जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, डॉ. रमीज संपत्ति बेचकर विदेश जाने की तैयारी में था। आरोप है कि उसके साथ विदेश जाने की योजना में शारिक भी शामिल था और उसने अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था। दोनों के विदेश जाने से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियां अब इस मामले से जुड़े दस्तावेजों, आरोपियों के संपर्कों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
इस मामले में सामने आए आरोपों ने मेडिकल शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और किसी भी प्रकार के दबाव से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने जैसे गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर यह जांच का विषय है कि छात्राओं को किस प्रकार प्रभावित किया गया और कथित घटनाओं में किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही। मामले की पूरी सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




