लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पुलिस और सेना के जवान की हत्या की साजिश रचने के मामले में जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं। पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़े गिरफ्तार चार संदिग्धों के मोबाइल फोन की जांच में सैन्य ठिकानों और धार्मिक स्थलों से संबंधित कई फोटो और वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को सूचनाएं भेजी जा रही थीं। मामले में अब उत्तर प्रदेश एटीएस गिरफ्तार आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर विस्तार से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, एटीएस ने पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्ठी के नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े पंजाब के तीन युवकों और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में गगनदीप सिंह, रजत कुमार और क्रिश शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन लोगों को लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी जवान की हत्या करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बदले तीन लाख रुपये दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इन मोबाइल में सैन्य प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों के फोटो तथा वीडियो मौजूद थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह सामग्री पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर तक पहुंचाई गई थी। एजेंसियां अब इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि तस्वीरें कब और किन परिस्थितियों में बनाई गईं तथा इन्हें किन लोगों तक भेजा गया।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि पुलिस और सेना के जवान को निशाना बनाने की कथित साजिश के अलावा अन्य संवेदनशील स्थानों को लेकर भी योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी संभावित हमले की योजना की पुष्टि होना बाकी है।
मामले में एक अन्य अहम खुलासा हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को लेकर हुआ है। जांच के मुताबिक, आरोपियों को लखनऊ में ही एक व्यक्ति ने विदेशी पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराए थे। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि हथियार देने वाला व्यक्ति राजधानी का निवासी नहीं था। वह कथित तौर पर बाहर से लखनऊ आया था और असलहा उपलब्ध कराने के बाद वहां से चला गया। जांच एजेंसियों को उसके संबंध में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और उन्हीं के आधार पर उसकी तलाश की जा रही है।
एटीएस की जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरफ्तार संदिग्धों का संपर्क पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से किस माध्यम से होता था और उन्हें किस तरह के निर्देश दिए जाते थे। मोबाइल फोन से मिले फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अब एजेंसी आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रही है। रिमांड मिलने पर उनसे नेटवर्क, हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति और कथित पाकिस्तानी संपर्कों के संबंध में पूछताछ की जाएगी।


