फर्रुखाबाद। नगर पंचायत संकिसा के मेरापुर में बंदरों का आतंक अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगा है। शुक्रवार सुबह बंदरों के झुंड की हलचल के दौरान एक पक्की दीवार गेट समेत गिर गई। दीवार के पास खेल रहे तीन मासूम भाई मलबे में दब गए। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने किसी तरह तीनों बच्चों को बाहर निकाला। हादसे में तीन वर्षीय देवेश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो भाई मामूली चोटों के साथ बाल-बाल बच गए। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।

मेरापुर निवासी पृथ्वीराज बाथम के तीन बच्चे देवेश (3), दिव्यांशु (6) और आशका (9) सुबह घर के बाहर खाली पड़ी जमीन पर खेल रहे थे। तीनों बच्चे घर के गेट के पास बैठे हुए थे। इसी दौरान बंदरों का एक झुंड वहां पहुंच गया। बंदरों की हलचल से पृथ्वीराज के घर की बाहर बनी पक्की दीवार हिल गई और देखते ही देखते गेट समेत पूरी दीवार बच्चों के ऊपर जा गिरी। अचानक हुए हादसे में तीनों बच्चे मलबे के नीचे दब गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर दौड़ पड़े।

ग्रामीणों और परिजनों ने तत्काल मलबा हटाकर तीनों बच्चों को बाहर निकाला। हादसे में देवेश के ऊपर लोहे का गेट गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दिव्यांशु और आशका को मामूली चोटें आईं। परिजन देवेश को उपचार के लिए ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के लोग भी घटना से स्तब्ध रह गए।

पृथ्वीराज ने बताया कि गांव में कई वर्षों से बंदरों का आतंक बना हुआ है। धीरे-धीरे बंदरों की संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। बंदरों के झुंड आए दिन गांव में उत्पात मचाते रहते हैं। कई बार बंदरों के हमले में ग्रामीण घायल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों में बंदरों के आतंक को लेकर आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या के कारण बच्चों और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल होता जा रहा है। लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से बंदरों को पकड़वाने और गांव में सुरक्षा के उचित इंतजाम कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या पर ध्यान दिया गया होता तो शायद ऐसी दुखद घटना से बचा जा सकता था।