दिवाली विशेष: डीएम और एसपी के सख्त निर्देशों के बावजूद नो एंट्री में धड़ल्ले से दौड़ रहे ई-रिक्शा व बड़े वाहन

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गाली गलौज करने वाले यातायात प्रभारी नहीं आए नजर, लगता रहा जाम, जनता बेहाल

फर्रुखाबाद। दीपावली के त्योहार पर जहां जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं, वहीं यातायात व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभा रहे यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। अधिकारियों की ओर से शहर को जाम मुक्त बनाने और आम जनमानस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन धरातल पर इन निर्देशों का कितना अनुपालन हो रहा है, यह शहर की सड़कों पर बनी जाम की स्थिति से स्पष्ट होता नजर आ रहा है।

दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर बाजारों में खरीदारी के लिए भारी संख्या में लोगों का आवागमन हो रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना पुलिस प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह स्वयं पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ यातायात पुलिस को भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाम की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद शहर के विभिन्न मार्गों पर जाम की समस्या आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

आरोप है कि दीपावली के दौरान नो एंट्री व्यवस्था के बावजूद ई-रिक्शा और बड़े वाहनों का प्रवेश लगातार जारी है। प्रतिबंधित मार्गों पर वाहनों की आवाजाही से बाजारों में यातायात का दबाव बढ़ रहा है और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, तो उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है?

गाली गलौज करने वाले यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की कार्यशैली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके गाली-गलौज और कथित मारपीट से संबंधित वीडियो के वायरल होने की बात सामने आने के बाद यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिस विभाग की छवि और आम नागरिकों के साथ व्यवहार के लिहाज से गंभीर विषय है। पुलिस का दायित्व कानून का पालन कराना है, न कि जनता के बीच अभद्र व्यवहार की छवि बनाना।

एक ओर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार न होने से अधिकारियों के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहरवासियों को उम्मीद थी कि दीपावली पर यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन जाम की समस्या और नो एंट्री नियमों के कथित उल्लंघन ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की कार्यशैली की समीक्षा की जाएगी? क्या वायरल वीडियो और नो एंट्री में वाहनों के प्रवेश के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?

दीपावली के त्योहार पर आम जनता को सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में यातायात व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शहरवासियों को जाम से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।