नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और कानून के शासन को मजबूत बनाने की बुनियादी जरूरत है।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि अज्ञानता, डर और बिना परखे विश्वासों के सहारे मनमानी सत्ता पनपती है। जब समाज में सवाल पूछने, तथ्यों को समझने और तर्क के आधार पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति कमजोर होती है, तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ता है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उनमें सवाल पूछने, तथ्यों की जांच करने और स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण अपनाकर ही एक जागरूक और जिम्मेदार समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान के प्रति जिज्ञासु रहने और किसी भी बात को बिना परखे स्वीकार न करने का संदेश दिया।




