डॉ. विजय गर्ग

भोजन जीवन, विकास और अच्छे स्वास्थ्य का आधार है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और शरीर के विभिन्न अंगों के सुचारु संचालन में सहायता करता है। लेकिन आधुनिक युग में हमारे भोजन की सुरक्षा चिंता का विषय बनती जा रही है। कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों, कृत्रिम रंगों, परिरक्षकों और अन्य हानिकारक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। खेतों से लेकर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और रसोई तक, भोजन की आपूर्ति के विभिन्न चरणों में रासायनिक प्रदूषण हो सकता है। जो भोजन हमारे शरीर को पोषण देने के लिए है, वही कभी-कभी स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

## रसायनों का बढ़ता उपयोग

आधुनिक कृषि में फसलों का उत्पादन बढ़ाने तथा पौधों को कीटों, खरपतवारों और बीमारियों से बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। इनसे कृषि उत्पादकता बढ़ाने और बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिली है। लेकिन इनका अत्यधिक या अनुचित उपयोग मिट्टी, पानी और कृषि उत्पादों को दूषित कर सकता है।

यदि कीटनाशकों का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं किया जाता, तो उनके अवशेष फलों, सब्जियों और अनाज में रह सकते हैं। इसी प्रकार, दूषित सिंचाई का पानी और प्रदूषित मिट्टी भी फसलों में अवांछित पदार्थ पहुँचा सकते हैं। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब किसान प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग करते हैं, निर्धारित मात्रा से अधिक छिड़काव करते हैं या फसल को निर्धारित प्रतीक्षा अवधि पूरी होने से पहले काट लेते हैं।

उचित मात्रा और सही तरीके से उपयोग किए जाने पर रासायनिक उर्वरक अपने आप में हानिकारक नहीं होते। वास्तविक चिंता उनके अत्यधिक, असंतुलित और अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न होती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँच सकता है और खाद्य पदार्थों के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है।

## प्रसंस्कृत भोजन और कृत्रिम पदार्थ

पैकबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अपनी सुविधा, उपलब्धता और कभी-कभी कम कीमत के कारण लोकप्रिय हो गए हैं। इनमें भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाले परिरक्षक, स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ, कृत्रिम रंग और मिठास प्रदान करने वाले तत्व इस्तेमाल किए जा सकते हैं। स्वीकृत खाद्य योजक निर्धारित सीमाओं के भीतर उपयोग किए जाने पर सुरक्षित हो सकते हैं। लेकिन प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल, उनकी अत्यधिक मात्रा और खाद्य पदार्थों में मिलावट स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है।

कुछ विक्रेता मिठाइयों, मसालों, सॉस और पेय पदार्थों को अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबंधित रंगों का उपयोग कर सकते हैं। दूध, खाद्य तेल, मसालों और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों में मिलावट भी एक गंभीर समस्या है। ऐसी गतिविधियों से उपभोक्ताओं के शरीर में ऐसे पदार्थ पहुँच सकते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हैं।

यह समझना आवश्यक है कि हर खाद्य योजक हानिकारक नहीं होता और न ही प्रत्येक पैकबंद खाद्य पदार्थ असुरक्षित होता है। खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा पदार्थ इस्तेमाल किया गया है, उसकी मात्रा कितनी है, उसके संपर्क में कितनी बार आया जाता है और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है या नहीं।

## दूषित भोजन के स्वास्थ्य पर प्रभाव

रासायनिक प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन-सा पदार्थ मौजूद है, उसकी कितनी मात्रा शरीर में पहुँचती है और उसके संपर्क की अवधि कितनी है। कुछ जहरीले रसायनों की अधिक मात्रा शरीर में पहुँचने से विषाक्तता, पाचन संबंधी समस्याएँ, तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षण या महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान हो सकता है।

कुछ कीटनाशकों, भारी धातुओं और औद्योगिक प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क को तंत्रिका तंत्र, गुर्दों, यकृत, प्रजनन स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभावों से जोड़ा गया है। कुछ पदार्थ कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक रसायन का जोखिम अलग होता है और भोजन में किसी रासायनिक अवशेष की उपस्थिति का यह अर्थ नहीं है कि उसे खाने से बीमारी होना निश्चित है।

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को कुछ प्रदूषकों से विशेष सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है। चूँकि कई हानिकारक पदार्थों की पहचान केवल देखकर, सूँघकर या स्वाद से नहीं की जा सकती, इसलिए प्रयोगशालाओं में जाँच और प्रभावी निगरानी अत्यंत आवश्यक है।

## सरकार और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका

खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल उपभोक्ताओं पर नहीं छोड़ी जा सकती। सरकारों और नियामक संस्थाओं को सुनिश्चित करना चाहिए कि कृषि में इस्तेमाल होने वाले रसायनों पर उचित नियंत्रण हो और खाद्य उत्पाद निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

खेतों, बाजारों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और भंडारण केंद्रों का नियमित निरीक्षण आवश्यक है। मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में फलों, सब्जियों, दूध, मसालों, अनाज और पैकबंद खाद्य पदार्थों के नमूनों की कीटनाशक अवशेषों, भारी धातुओं और प्रतिबंधित पदार्थों के लिए जाँच की जानी चाहिए।

जानबूझकर मिलावट करने, असुरक्षित भोजन बेचने और प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन, जैविक कीट नियंत्रण, कीटनाशकों के उचित उपयोग और फसल की सुरक्षित कटाई के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था, सही लेबलिंग और स्वच्छ उत्पादन प्रक्रियाएँ अपनानी चाहिए। उपभोक्ताओं की शिकायतों और असुरक्षित उत्पादों से संबंधित जानकारी के लिए प्रभावी व्यवस्था भी उपलब्ध होनी चाहिए।

## उपभोक्ता क्या कर सकते हैं?

उपभोक्ता कुछ सरल उपाय अपनाकर अनावश्यक जोखिमों को कम कर सकते हैं।

- फलों और सब्जियों को खाने से पहले साफ बहते पानी के नीचे अच्छी तरह धोएँ। इससे सतह पर मौजूद कुछ अवशेष कम हो सकते हैं, लेकिन सभी प्रदूषक पूरी तरह नहीं हटते।

- आवश्यकता के अनुसार कुछ फलों और सब्जियों के छिलके उतारें या प्रभावित हिस्सों को काट दें। ध्यान रखें कि इससे कुछ पोषक तत्व भी कम हो सकते हैं।

- विश्वसनीय स्रोतों से खाद्य पदार्थ खरीदें और पैकेट, समाप्ति तिथि, सामग्री की सूची तथा आवश्यक नियामक जानकारी की जाँच करें।

- संदिग्ध रंग, असामान्य गंध या मिलावट के संकेत वाले उत्पादों से बचें। हालांकि, यह भी याद रखें कि कई प्रदूषक दिखाई नहीं देते।

- केवल एक प्रकार के भोजन पर निर्भर रहने के बजाय विविध और संतुलित आहार अपनाएँ।

- खाद्य सुरक्षा संबंधी सरकारी सलाह का पालन करें और मिलावट का संदेह होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

उपभोक्ताओं को डर या अफवाहों के आधार पर निर्णय नहीं लेने चाहिए। जैविक खेती से प्राप्त भोजन कुछ कृत्रिम कीटनाशकों के संपर्क को कम कर सकता है, लेकिन इससे सभी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त होने की गारंटी नहीं मिलती। हर प्रकार के खाद्य पदार्थ के लिए उचित रखरखाव, सुरक्षित उत्पादन और विश्वसनीय जाँच महत्वपूर्ण हैं।

## सुरक्षित खाद्य व्यवस्था की ओर

इस समस्या का समाधान कृषि उत्पादकता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में है। किसानों को सुरक्षित कीट नियंत्रण के किफायती तरीके उपलब्ध होने चाहिए, जबकि खाद्य उत्पादकों को जिम्मेदार उत्पादन प्रक्रियाएँ अपनानी चाहिए। वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक परीक्षण सुविधाएँ और जन-जागरूकता खाद्य पदार्थों के उपभोक्ताओं तक पहुँचने से पहले ही प्रदूषण की पहचान करने में मदद कर सकती हैं।

स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संगठन और मीडिया लोगों को खाद्य लेबल पढ़ने, संतुलित पोषण और भोजन को सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में जागरूक कर सकते हैं। सरकारों को नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनाने में सहायता देनी चाहिए।

अंततः, भोजन केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि मानव कल्याण का आधार है। स्वस्थ समाज के लिए पौष्टिक, किफायती और सुरक्षित भोजन आवश्यक है। हमारी थाली को हानिकारक प्रदूषण से बचाने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योगों, नियामक संस्थाओं और उपभोक्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

संदेश स्पष्ट है: भोजन का उद्देश्य जीवन को पोषण देना है, उसे खतरे में डालना नहीं। हमारी खाद्य आपूर्ति को रासायनिक प्रदूषण से सुरक्षित रखना केवल वैज्ञानिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।

डॉ. विजय गर्ग

सेवानिवृत्त प्राचार्य | प्रख्यात वैज्ञानिक

स्ट्रीट कौर चंद, एम.एच.आर., मलोट, पंजाब – 152107

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