लखनऊ। शनिवार को राजकीय नर्सेस संघ के बैनर तले नर्सों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। नर्सों ने काला कपड़ा पहनकर दो घंटे तक कार्य बहिष्कार किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वादा खिलाफी का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना था कि प्रदेश में महिला सम्मान और नारी सशक्तिकरण की बातें तो की जाती हैं, लेकिन उनकी मांगों और आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका आरोप है कि महिलाओं का सम्मान केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
नर्सों ने बताया कि वे पिछले 23 दिनों से अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है। राजकीय नर्सेस संघ की कोषाध्यक्ष गीतांशु वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला सम्मान की बात करते हैं, लेकिन नर्सों को अपनी जायज मांगों के लिए लगातार प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर कई दिनों से आवाज उठा रही हैं, तो उनकी बातों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।
गीतांशु वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक उनकी मांगें नहीं पहुंच रही हैं या फिर उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पांच सूत्रीय मांगों को लेकर नर्सों को धूप और बारिश में भी प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार में महिला कर्मचारियों को अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। नर्सों ने मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि शनिवार को यह प्रदर्शन बलरामपुर अस्पताल सहित प्रदेश के सभी अस्पतालों में किया गया। उन्होंने कहा कि करीब एक साल पहले इसी अस्पताल परिसर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने नर्सों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हुआ है। अशोक कुमार के मुताबिक, नर्सें पिछले 23 दिनों से रोजाना दो घंटे का कार्य बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज करा रही हैं।
संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगी। उनका कहना है कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं निकलने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें पूरा करने की अपील की है।
राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश ने अपनी पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नर्सिंग कर्मचारियों को गृह जनपद में तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करना, निदेशालय से लेकर चिकित्सालय स्तर तक नर्सिंग संवर्ग के सभी पदों पर पदोन्नति सुनिश्चित करना तथा अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों के लिए पालनाघर यानी क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है।
इसके अलावा संघ की मांग है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए नर्सिंग संवर्ग को भी बीएससी नर्सिंग की तरह सवेतन अवकाश दिया जाए। वहीं, जिन जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज में बदला जा रहा है, वहां पहले से कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों को उसी संस्थान में समायोजित किया जाए। यदि ऐसा संभव न हो तो उनके पदों सहित उन्हें पूर्व व्यवस्था में वापस किया जाए, ताकि उनके पद और सेवा संबंधी हित सुरक्षित रह सकें।



