क्रासर
जागरूकता अभियान के बीच सड़कों पर मनमानी, क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर दौड़ रहे टेंपो और ई-रिक्शा
फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेशभर में यातायात नियमों का पालन कराने के लिए यातायात माह चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने और लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन जनपद में यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी और अव्यवस्थाओं को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यातायात माह का उद्देश्य केवल जागरूकता अभियान तक ही सीमित रह गया है।
यातायात पुलिस एक ओर लोगों को हेलमेट, सीट बेल्ट और सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने की नसीहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को लेकर चलने वाले टेंपो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है। बुधवार दोपहर स्कूलों की छुट्टी के बाद लालगेट पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला। टेंपो और ई-रिक्शा में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। कई वाहनों में छोटे-छोटे बच्चों को आगे की सीट पर बैठाया गया था। इस तरह की लापरवाही से किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की निगरानी में शहर की सड़कों पर इस तरह की स्थिति कैसे बनी हुई है? क्या यातायात पुलिस को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी नहीं है, या फिर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है? इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।
शहर के मुख्य बाजारों में भी यातायात व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। त्योहारों के दौरान बाजारों में भारी भीड़ उमड़ती है, ऐसे में ई-रिक्शा के आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। इसके बावजूद मुख्य बाजारों में ई-रिक्शा की भरमार जाम की समस्या को बढ़ा रही है। राहगीरों, दुकानदारों और बाजार पहुंचने वाले ग्राहकों को घंटों जाम की परेशानी झेलनी पड़ती है। बाजारों में यातायात नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
हालांकि लालगेट पर यातायात पुलिस ने अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले कई वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की और चालकों को निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने तथा आगे की सीट पर बच्चों को ले जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चालकों में हड़कंप मच गया। लेकिन सवाल यह है कि जब यातायात माह के दौरान लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, तो फिर स्कूली बच्चों को लेकर ऐसी लापरवाही बार-बार क्यों सामने आ रही है?
पुलिस अधीक्षक आरती सिंह द्वारा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच यातायात प्रभारी की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यातायात माह केवल चालान काटने या जागरूकता रैली निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और स्कूलों के आसपास नियमित निगरानी भी जरूरी है।
लालगेट पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला सामने आने के बाद यातायात प्रभारी ओमप्रकाश पांडे की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि यातायात पुलिस केवल चेतावनी देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करती है या फिर नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ शहर की यातायात व्यवस्था को भी पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाती है।




