एंटी करप्शन की नजर में उद्यान विभाग
फर्रुखाबाद
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाए गए विकास भवन में यदि अनुदान की फाइलें बिना सुविधा शुल्क के आगे न बढ़ें तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। विकास भवन स्थित आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी कार्यालय में आलू अनुदान के नाम पर वसूली की शिकायतें चर्चा में हैं। उद्यान निरीक्षक पुष्पेंद्र यादव और सहायक उद्यान निरीक्षक अभिषेक कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में एंटी करप्शन की नजर इस कार्यालय की गतिविधियों पर होने की बात सामने आ रही है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कई योजनाएं संचालित की हैं। भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना के तहत आलू के बाजार भाव में गिरावट से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहायता का प्रावधान है। वहीं निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण शुल्क पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान दिया जा रहा है। इसमें अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र और 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पात्रता सीमा के अनुसार किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
फर्रुखाबाद में इस योजना के तहत अब तक 1,250 किसानों को लाभ दिया जा चुका है और करीब 1.30 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित होने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी धनराशि किसानों तक पहुंचाने वाली योजना में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। शासन की व्यवस्था के अनुसार पात्रता और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अनुदान की धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। ऐसे में सवाल है कि जब आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन तथा डीबीटी आधारित है तो फिर किसानों को कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं यदि कहीं सुविधा शुल्क की मांग हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए
विकास भवन के इसी कार्यालय में किसानों की आवाजाही और अनुदान संबंधी कामकाज के बीच उठ रहे वसूली के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पुष्पेंद्र यादव और अभिषेक कुमार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किसानों से किसी प्रकार की अवैध धनराशि तो नहीं मांगी जा रही।इधर, विकास भवन के डीपीआरओ कार्यालय और जिला समाज कल्याण विभाग पर भी एंटी करप्शन की नजर है
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित कार्यालभिलेखों, आवेदनों और किसानों से प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

