- 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज होने का मामला

- 10,470 आवेदन स्वीकार और 3,309 निरस्त

- दस्तावेज नहीं मिलने पर आयोग सख्त

- एफआईआर में बीएनएस की धारा 198 जोड़ने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) पीसीएस मयंक गोस्वामी और पीसीएस हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा।

जांच में सामने आया कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच ईसीआईनेट पोर्टल पर कंप्यूटर सहायक की लॉगिन आईडी का कथित दुरुपयोग कर मतदाता विवरण में संशोधन के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए गए। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकार किए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त किए गए। जांच के दौरान इन आवेदनों से संबंधित मूल फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले।

निर्वाचन आयोग ने दोनों अधिकारियों और मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने के निर्देश दिए हैं। यह धारा लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना से संबंधित है। आयोग ने संबंधित न्यायालय में मामले की प्रभावी पैरवी करने को भी कहा है।

आयोग ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका पर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा पीलीभीत जिले की सभी चार विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

पीलीभीत प्रकरण के बाद निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करने को कहा है। विशेष रूप से फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित प्रविष्टियों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई से प्रदेश के निर्वाचन तंत्र में जवाबदेही और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।