- बढ़ती लागत से डेयरी उद्योग पर दबाव।

अनुराग तिवारी

नई दिल्ली। देश के डेयरी उद्योग में दूध की कीमतों को लेकर हलचल तेज हो रही है। मुंबई में भैंस के दूध की थोक कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब कर्नाटक में नंदिनी ब्रांड के दूध और दही की नई दरें लागू होने की खबर सामने आई है। एक नवंबर 2026 से लागू बताई जा रही नई दरों के अनुसार, कर्नाटक में टोंड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि विशेष टोंड दूध की कीमत 52 रुपये से बढ़कर 64 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। वहीं, एक किलोग्राम दही का पैकेट 54 रुपये से बढ़कर 68 रुपये का हो गया है। मुंबई में भी भैंस के दूध की थोक कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर होने की जानकारी सामने आई थी। इन बदलावों के बीच अब डेयरी कारोबारियों और उपभोक्ताओं की निगाहें दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और उत्तर प्रदेश के बाजारों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश के स्थानीय डेयरी बाजार के उपलब्ध औसत अनुमान के अनुसार, किसानों से दूध की खरीद दर लगभग 60 रुपये प्रति लीटर तक बताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक दर दूध में वसा और ठोस-अवसा रहित पदार्थों की मात्रा, गुणवत्ता, क्षेत्र तथा संबंधित डेयरी की खरीद नीति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। दूसरी ओर, पशु आहार की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने पशुपालकों की लागत पर अतिरिक्त दबाव डाला है। हरा चारा, सूखा चारा, दाना और पशुओं के पोषण पर होने वाला खर्च दूध उत्पादन की लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनकी कीमतें बढ़ने से किसानों के लिए दूध उत्पादन को लाभकारी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसका असर उन निजी डेयरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के बाजारों में पॉली पैक दूध बेचती हैं। इन कंपनियों को किसानों से दूध खरीदने के बाद उसका परीक्षण, शीतलीकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और वितरण करना पड़ता है। बिजली, कर्मचारियों तथा विपणन से जुड़े खर्च भी उनकी कुल लागत में शामिल होते हैं। ऐसे में यदि किसानों से दूध खरीदने की कीमत और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ते रहें, लेकिन कंपनियां लंबे समय तक बिक्री मूल्य में संशोधन नहीं कर पाएं, तो उनके लाभ में कमी आ सकती है और कुछ कंपनियों के सामने घाटे में कारोबार करने का जोखिम पैदा हो सकता है।

हालांकि, कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति उनकी खरीद दर, बिक्री मूल्य, उत्पादों की गुणवत्ता, वितरण व्यवस्था और परिचालन क्षमता पर निर्भर करती है। मुंबई और कर्नाटक में सामने आए मूल्य बदलावों के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यदि उत्पादन लागत और दूध की खरीद दरों पर दबाव बना रहता है, तो आने वाले समय में कंपनियों के लिए मौजूदा बिक्री मूल्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में कीमतों में संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणा के बिना दूध के दाम बढ़ने को निश्चित नहीं माना जा सकता। दूध की कीमतों का सीधा संबंध किसानों की आय, डेयरी कंपनियों की आर्थिक स्थिति और आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट से है। किसानों को उचित खरीद मूल्य मिलना जरूरी है, वहीं उपभोक्ताओं के लिए किफायती दरों पर दूध उपलब्ध रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मुंबई से कर्नाटक तक सामने आए मूल्य बदलावों, उत्तर प्रदेश में दूध की खरीद लागत और पशु आहार की बढ़ती कीमतों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश की डेयरी कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद पुराने बिक्री मूल्य पर कितने समय तक कारोबार कर पाएंगी। यदि लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर लगातार बढ़ता रहा, तो कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दूध की कीमतों में संभावित बदलाव पर डेयरी उद्योग, किसानों और उपभोक्ताओं की निगाहें रहेंगी।

फिलहाल उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमतें बढ़ाने की किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा लागत संबंधी चुनौतियों को देखते हुए सस्ते दूध की उपलब्धता बनाए रखना डेयरी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।