कभी-कभी हम किसी को अपनी जिंदगी में इतनी जगह दे देते हैं कि वह हमारी भावनाओं को ही हमारी कमजोरी समझने लगता है।

शरद कटियार

इंसान की सबसे बड़ी खूबी उसका अपनापन है। किसी को प्यार देना, उसकी परवाह करना, उसकी गलतियों को माफ करना और उसे अपनेपन का एहसास कराना बहुत खूबसूरत भावनाएं हैं। लेकिन जिंदगी में एक सीमा हर रिश्ते की होती है। जब हम किसी को जरूरत से ज्यादा महत्व देने लगते हैं, उसकी हर गलती को नजरअंदाज करते हैं और उसके हर व्यवहार को सहन करते रहते हैं, तब कई बार सामने वाला उस प्यार की कीमत समझने के बजाय उसे अपना अधिकार समझने लगता है।

कभी-कभी कोई गैर भी हमारी जिंदगी में इतना खास बन जाता है कि हम उसके लिए अपने लोगों तक को नजरअंदाज कर देते हैं। उसकी खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं, उसकी परेशानी को अपनी परेशानी समझते हैं और उसके सम्मान के लिए खुद का सम्मान तक दांव पर लगा देते हैं। मगर जब वही व्यक्ति हमारे विश्वास, भावनाओं और संस्कारों की कद्र करना छोड़ देता है, तब दिल में एक ऐसा दर्द पैदा होता है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता।

सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है, जब जिसे हमने अपनेपन का सबसे ऊंचा स्थान दिया, वही हमें यह एहसास करा दे कि हमारी भावनाओं की उसके जीवन में कोई अहमियत ही नहीं थी।

ऐसे धोखे का दर्द केवल किसी व्यक्ति के दूर जाने का दर्द नहीं होता, बल्कि उन तमाम उम्मीदों के टूटने का दर्द होता है, जिन्हें हमने उसके साथ जोड़कर देखा था। उसकी कही बातें, बिताए पल, किए गए वादे और उसके लिए किए गए त्याग बार-बार याद आते हैं।

मन कहता है कि उसे जिंदगी से निकाल दो, लेकिन आत्मा उन यादों और मोह के कारण ऐसा करने से रोकती है। यही भावनात्मक उलझन इंसान को भीतर तक तोड़ देती है।

लेकिन एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि किसी से प्रेम करना गलत नहीं है, किसी को अपनापन देना भी गलत नहीं है, मगर अपने आत्मसम्मान को खोकर किसी को अपने जीवन में बनाए रखना जरूर गलत है।

रिश्तों में प्यार होना चाहिए, लेकिन सम्मान उससे भी ज्यादा जरूरी है। किसी को इतना अधिकार मत दीजिए कि वह आपकी अच्छाई को आपकी कमजोरी समझने लगे। माफ करना सीखिए, लेकिन हर बार अपमान सहना अपनी नियति मत बनाइए।

क्योंकि कुछ लोग जिंदगी में सबक बनकर आते हैं। वे हमें सिखा जाते हैं कि हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता, हर अपनापन सच्चा नहीं होता और हर रिश्ते को बचाने की जिम्मेदारी अकेले हमारी नहीं होती।

अंत में बस इतना ही...

किसी को इतना मत चाहो कि उसके बदल जाने पर तुम खुद को ही खो बैठो। किसी को इतनी अहमियत मत दो कि वह तुम्हारे अस्तित्व को ही भूल जाए। और किसी के मोह में अपनी जिंदगी की खुशियों को कैद मत कर लो।

क्योंकि दुनिया में किसी को खोने का दर्द समय के साथ कम हो सकता है, लेकिन किसी अपने के हाथों अपने विश्वास का टूटना इंसान को उम्र भर कुछ न कुछ सिखाता रहता है।

अपनापन दीजिए, प्रेम दीजिए, सम्मान दीजिए... लेकिन अपनी आत्मा का सुकून और अपना आत्मसम्मान किसी के हाथों गिरवी मत रखिए।

क्योंकि जिंदगी में सबसे जरूरी रिश्ता वह है, जिसमें आप किसी को चाहने के साथ-साथ खुद की नजरों में भी सम्मानित बने रहें।