अनुराग तिवारी
नई दिल्ली। मोबाइल फोन पर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान करना जल्द आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग की कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी) व्यवस्था के तहत फोन आने पर कॉल करने वाले का नाम मोबाइल स्क्रीन पर प्रदर्शित करने की सुविधा दी जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अनजान कॉल की पहचान आसान बनाना और फर्जी फोन कॉल के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक नवंबर 2026 से देशभर में यह सुविधा लागू होने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसके देशव्यापी क्रियान्वयन की तारीख और सभी दूरसंचार कंपनियों के ग्राहकों को इसकी उपलब्धता की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इस व्यवस्था में मोबाइल नंबर पहले से सुरक्षित होने पर फोन में दर्ज नाम दिखाई देगा, जबकि नंबर सुरक्षित नहीं होने की स्थिति में दूरसंचार सेवा प्रदाता के ग्राहक पंजीकरण अभिलेख में उपलब्ध नाम प्रदर्शित हो सकता है। यह सुविधा ट्रूकॉलर जैसे अनुप्रयोगों से अलग होगी, क्योंकि इसमें नाम दिखाने का आधार दूरसंचार कंपनी के अभिलेख होंगे, न कि केवल किसी तीसरे पक्ष का पहचान संबंधी आंकड़ा। इससे लोगों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पहचानने में सहायता मिल सकती है और संदिग्ध कॉल के प्रति सतर्कता बढ़ सकती है। हालांकि, मोबाइल स्क्रीन पर नाम दिखाई देने मात्र से कॉल करने वाले की पहचान प्रमाणित नहीं हो जाती। इसलिए लोगों को फोन पर बैंक खाते की जानकारी, गोपनीय संकेतांक, एकमुश्त पासवर्ड (ओटीपी) या अन्य निजी विवरण साझा करने से बचना चाहिए। इस सुविधा की वास्तविक उपलब्धता दूरसंचार कंपनियों की तकनीकी तैयारी और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगी। यदि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अनजान कॉल की पहचान के लिए अलग अनुप्रयोग पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।




