- एसटीएफ की रिपोर्ट में 12 कर्मचारियों के नाम

- 6 नवंबर को आपात बैठक

- सात पेज की एसटीएफ रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय

- आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और जिम्मेदारियां वापस लेने पर होगा विचार

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में कथित धर्मांतरण मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की सात पेज की रिपोर्ट में केजीएमयू के 12 कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 6 नवंबर को कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई है।

जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ की रिपोर्ट में कई बड़े और छोटे अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन अब संस्थागत स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।

6 नवंबर को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में रिपोर्ट में नामजद डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक में संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उनकी वर्तमान जिम्मेदारियां वापस लेने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।

एसटीएफ की सात पेज की रिपोर्ट में केवल कर्मचारियों के नाम ही नहीं, बल्कि संस्थान के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में कार्यपरिषद की बैठक में यह तय किया जाएगा कि संबंधित लोगों के खिलाफ आगे किस तरह की कार्रवाई की जाए।

केजीएमयू की कार्यपरिषद की आपात बैठक इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय होने की संभावना है।

फिलहाल 12 कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद केजीएमयू परिसर में हलचल तेज है। हालांकि, रिपोर्ट में नाम आने मात्र से किसी की संलिप्तता कानूनी रूप से साबित नहीं होती। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और जांच के अंतिम निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे।