सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को श्रीलंकाई नागरिक मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास की जमानत बरकरार रखने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी। मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज आतंकी साजिश के आरोपों से जुड़ा है।
इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि आरोपी भारतीय नागरिक नहीं है और उस पर UAPA के तहत गंभीर आरोप हैं। एजेंसी ने जमानत रद्द किए जाने की मांग का समर्थन किया था। इससे पहले चेन्नई की विशेष अदालत ने जुलाई 2022 में आरोपी की जमानत रद्द कर दी थी। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में निचली अदालत का आदेश पलटते हुए जमानत बहाल कर दी थी, जिसके खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43D(7) के तहत किसी विदेशी नागरिक को जमानत देने पर रोक तभी लागू होती है, जब यह प्रथम दृष्टया साबित हो कि उसने भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से प्रवेश किया था। अदालत के अनुसार, इस मामले में NIA ऐसा कोई पर्याप्त आधार पेश नहीं कर सकी, जिससे आरोपी का भारत में शुरुआती प्रवेश अवैध साबित हो। अभियोजन के रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी वैध वीजा पर भारत आया था और वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद उसका रहना अवैध हो गया था।
अदालत के इस फैसले का मुख्य आधार यह है कि केवल विदेशी नागरिक होना UAPA के तहत जमानत से वंचित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत में प्रवेश के समय कानूनी अनुमति थी या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए केंद्र की अपील खारिज कर दी। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है; मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है।

