नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली (Delhi) में बार-बार होने वाले धरना-प्रदर्शन, राजनीतिक रैलियों और मार्च से प्रभावित हो रहे व्यापार और आम जनजीवन को लेकर व्यापारियों ने आवाज उठाई है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु (Taranjit Singh Sandhu) को पत्र लिखकर राजधानी के बाहरी इलाकों में धरना-प्रदर्शन के लिए अलग से स्थान निर्धारित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों का अधिकार भी सुरक्षित रहेगा और व्यापार तथा आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित नहीं होगी।

CAIT ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और संगठन इसके अधिकार का समर्थन करता है। हालांकि, इसके साथ ही आम नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी है, ताकि लोग बिना किसी परेशानी और रुकावट के अपने रोजमर्रा के काम कर सकें। रिपोर्ट के मुताबिक, उपराज्यपाल को लिखे पत्र में संगठन ने कहा है कि विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार शहर को ठप करने का अधिकार नहीं हो सकता। इसी तरह लोकतांत्रिक अधिकारों के नाम पर लोगों के कारोबार करने के अधिकार की भी बलि नहीं दी जा सकती।

CAIT का कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान व्यापारिक गतिविधियां बाधित होने से दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और रोजाना कमाकर खाने वाले लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि प्रदर्शन के लिए ऐसे स्थान निर्धारित किए जाएं, जहां लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी हो सके और आम जनजीवन तथा व्यापारिक गतिविधियां भी सामान्य बनी रहें।

CAIT ने अपने पत्र में दिल्ली के आर्थिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी देश का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है। यहां लाखों लोगों की आजीविका व्यापार और व्यावसायिक गतिविधियों पर निर्भर है। देश की सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था में भी दिल्ली की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बार-बार होने वाले धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक रैलियों का असर केवल व्यापारियों और दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। संगठन के मुताबिक, इन प्रदर्शनों से सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों, फेरीवालों, दिहाड़ी मजदूरों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, कामगारों, डिलीवरी कर्मचारियों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है।

पत्र में संगठन ने प्रमुख रूप से ये मांगें रखी हैं:

बाहरी इलाकों में तय हों प्रदर्शन स्थल: दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक रैलियों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाएं और उनकी आधिकारिक घोषणा की जाए।

व्यापार और बाजार प्रभावित न हों: शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और वाहनों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे।

कमजोर वर्गों की आजीविका सुरक्षित रहे: छोटे दुकानदारों, ऑटो चालकों, व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की रोजी-रोटी का विशेष ध्यान रखा जाए।

सरकारी विभागों में बेहतर तालमेल हो: विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

स्थायी व्यवस्था बनाने की अपील

CAIT ने उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि इस मामले में केवल अस्थायी इंतजाम करने के बजाय दीर्घकालिक नीति बनाई जाए। संगठन का मानना है कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों से लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है। इससे राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान आम लोगों और कारोबारियों को होने वाली परेशानियों को भी कम किया जा सकेगा।