लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नाव हादसों पर रोक लगाने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत गंगा, यमुना और सरयू समेत प्रदेश की 11 नदियों में चलने वाली नावों और जहाजों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना इंजन वाली पारंपरिक नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही सरकार नाविकों और यात्रियों के बीमा की व्यवस्था भी करेगी।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक, नई नियमावली का उद्देश्य नदियों में सुरक्षित जल परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके तहत नावों का पंजीकरण कर उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। किस नदी और घाट पर कितनी नावें संचालित हो रही हैं, उनकी यात्री क्षमता कितनी है और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नाविकों को यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक किट देने की भी योजना है।

प्रदेश में इस साल हुए दो बड़े नाव हादसों के बाद जल परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। सात मई को हमीरपुर में नाव पलटने से नौ लोग डूब गए थे। इस हादसे में एक महिला और पांच बच्चों समेत छह लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 11 अप्रैल को मथुरा में यमुना नदी में नाव हादसे में 11 लोगों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने नावों की क्षमता, सुरक्षा इंतजाम और संचालन की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए थे।

नई नियमावली में इंजन से चलने वाली यांत्रिक नावों और पारंपरिक गैर-यांत्रिक नावों, दोनों को शामिल किया गया है। यांत्रिक श्रेणी में इंजन वाली नावें, स्टीमर और बड़े जलयान आएंगे, जबकि गैर-यांत्रिक श्रेणी में बिना इंजन वाली पारंपरिक नावें शामिल होंगी। इनके पंजीकरण, संचालन और सुरक्षा से संबंधित नियम निर्धारित किए जाएंगे। सरकार ने गैर-यांत्रिक नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क तय किया है, ताकि छोटे नाविकों पर अधिक आर्थिक बोझ डाले बिना उन्हें औपचारिक व्यवस्था से जोड़ा जा सके।

परिवहन मंत्री ने बताया कि नौ राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद यांत्रिक नावों की तीन श्रेणियां तय की गई हैं। इन श्रेणियों के आधार पर नावों के पंजीकरण और शुल्क की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यात्री क्षमता और भार से संबंधित श्रेणियों के कुछ आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। नई व्यवस्था में यांत्रिक नावों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

मंत्री के अनुसार, वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या समेत कई जिलों से नावों की संख्या और संचालन का विवरण मांगा गया था, लेकिन पूरा डाटा उपलब्ध नहीं हो पाया। वाराणसी से करीब 1,200 नावों के संचालन की जानकारी मिली थी। नई नियमावली लागू होने के बाद सरकार के पास विभिन्न नदियों और घाटों पर संचालित नावों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे नावों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर निगरानी रखने और दुर्घटनाओं की स्थिति में जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

नावों के पंजीकरण की जिम्मेदारी जिला स्तर पर एआरटीओ प्रशासन और तहसील स्तर पर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर को दिए जाने का प्रावधान है। नियमावली में कुल 16 अध्याय हैं। इनमें पहले 14 अध्याय यांत्रिक जलयानों, 15वां अध्याय गैर-यांत्रिक जलयानों और 16वां अध्याय दोनों प्रकार के जलयानों के संचालन और विनियमन से संबंधित है। नियमावली को अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के तहत अधिसूचित किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद मौजूदा जलयानों को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 90 दिन का समय देने का प्रावधान भी है।

सरकार का कहना है कि नाविकों और यात्रियों के बीमा तथा सुरक्षा किट की व्यवस्था से जल परिवहन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नियमों के तहत नावों के संचालन से नदी पर्यटन, पर्यावरण के अनुकूल माल परिवहन और स्थानीय लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है।