- 18,885 करोड़ की स्वीकृत लागत के मुकाबले 27,342 करोड़ रुपये के टेंडर पर जांच की मांग

- पांचों बिजली कंपनियों में स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराने का प्रस्ताव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रदेश के 3.82 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से फीडबैक लेने की मांग उठाई गई है। मांग की गई है कि जब तक उपभोक्ताओं की संतुष्टि से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नहीं होते, तब तक परियोजना के अगले चरण को आगे न बढ़ाया जाए।

स्मार्ट मीटर परियोजना की स्वीकृत लागत 18,885 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि इसके लिए 27,342 करोड़ रुपये के टेंडर किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। स्वीकृत लागत और टेंडर राशि के बीच अंतर को लेकर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है, ताकि लागत निर्धारण और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट हो सके।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 1.05 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। परियोजना के निर्धारित लक्ष्य का करीब 38.13 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी गई है।

मांग की गई है कि प्रदेश की पांचों बिजली कंपनियों के कार्यक्षेत्र में किसी स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से उपभोक्ता संतुष्टि सर्वे कराया जाए। इसमें बिजली बिलों की स्थिति, मोबाइल रिचार्ज व्यवस्था, बैलेंस समाप्त होने पर बिजली आपूर्ति कटने और शिकायतों के निस्तारण जैसे मुद्दों पर उपभोक्ताओं की राय ली जाए।

स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्याओं और अनुभवों का आकलन किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मांग है कि सर्वे के नतीजे सार्वजनिक किए जाएं और उपभोक्ताओं की संतुष्टि के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाए।