पांच राज्यों में लागू दो-बच्चों की नीति पर पुनर्विचार की जरूरत, कोर्ट ने घटती प्रजनन दर का दिया हवाला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दो से अधिक बच्चे होने के आधार पर लोगों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने वाले कानूनों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे कानूनों पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट के अनुसार, देश में जनसंख्या वृद्धि और प्रजनन दर की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में यह दर 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। अदालत ने कहा कि 2.1 की प्रजनन दर को प्रतिस्थापन दर (Replacement Rate) माना जाता है। ऐसे में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकने संबंधी प्रावधानों की वर्तमान उपयोगिता पर विचार किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि देश के पांच राज्यों में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध से संबंधित नियम लागू हैं। इन प्रावधानों के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करने वाले व्यक्ति स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकते हैं। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद दो-बच्चों की नीति और चुनावी पात्रता से जुड़े कानूनों पर चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी को कानून में बदलाव का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इन प्रावधानों में किसी भी तरह का बदलाव संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अंतिम न्यायिक निर्णय के आधार पर ही होगा।




