एसडीएम न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं थम रहा निर्माण का प्रयास, तहसील और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

अमृतपुर,

न्यायालय के आदेशों का आखिर कितना असर है, इसका अंदाजा अमृतपुर तहसील क्षेत्र के एक भूमि विवाद से लगाया जा सकता है। एसडीएम न्यायालय द्वारा विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद पीड़ित ने विपक्षी पक्ष पर कब्जा करने और निर्माण कार्य कराने के प्रयास का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उसकी जमीन सुरक्षित नहीं है और वह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर है।

मामला मौजा गांधी, परगना खाखटमऊ, तहसील अमृतपुर स्थित गाटा संख्या 936, रकबा 0.0270 हेक्टेयर का है। इस भूमि को लेकर पूजा देवी बनाम कुनाल आदि के नाम से एसडीएम न्यायालय में वाद संख्या 6999/2026 विचाराधीन है। वादिनी की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि विपक्षीगण जबरन कब्जा कर निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी न्यायालय ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन के लिए तहसीलदार अमृतपुर और थानाध्यक्ष अमृतपुर को भी निर्देशित किया गया था। विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए थे।

इसके बावजूद पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी पक्ष न्यायालय के आदेश की परवाह किए बिना विवादित भूमि पर कब्जे और निर्माण की कोशिश कर रहा है। इससे पीड़ित परिवार परेशान है और उसे आशंका है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो न्यायालय के आदेश का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।

अब सवाल यह है कि जब एसडीएम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, तो उसका पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या तहसील और पुलिस प्रशासन न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराएगा या पीड़ित को न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर ही काटने पड़ेंगे।