लखनऊ। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव को इस बार लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं के रंगों से सजाने की विशेष तैयारी की गई है। दीपों की रोशनी के साथ रामनगरी की सड़कों और सांस्कृतिक मंचों पर देशभर के लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ देश के कई राज्यों से आने वाले लोक कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य के माध्यम से दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से परिचित कराएंगे।
दीपोत्सव में मथुरा का प्रसिद्ध मयूर नृत्य, सोनभद्र का करमा, झारखंड का पुरुलिया छऊ, राजस्थान का घूमर और बिहार की झिझिया विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की पारंपरिक लोक विधाएं भी आयोजन की सांस्कृतिक भव्यता को बढ़ाएंगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या में देश की अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोक कलाकारों के दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें मथुरा का मयूर और बम रसिया नृत्य, प्रयागराज का ढेढ़िया नृत्य, बांदा का पाई डंडा तथा सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य प्रमुख रहेंगे। वहीं अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही, डमरू और शंख नृत्य के माध्यम से अपनी स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेंगे।
इसके अलावा गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों को आकर्षित करेगा। इन लोकनृत्यों में संबंधित क्षेत्रों की परंपराओं, रहन-सहन और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिलेगी।
दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के कलाकार भी अपनी लोककलाओं का प्रदर्शन करेंगे। पश्चिम बंगाल के कलाकार श्रीखोल नृत्य, ओडिशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढ़ैय्या और शंख वादन प्रस्तुत करेंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे।
राजस्थान का घूमर और चरी नृत्य, बिहार की झिझिया, चेन्नई का कावड़ी, कड़गम एवं मयूर नृत्य तथा आंध्र प्रदेश का बोनालू भी दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। अलग-अलग राज्यों से आने वाले कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंगीत और नृत्य शैलियों के जरिए दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगे।




