कंपिल (फर्रुखाबाद): किसी दौर में कस्बे के बाशिंदों को सुबह उठने के लिए घड़ी के अलार्म की जरूरत नहीं पड़ती थी। भोर की पहली किरण के साथ जैसे ही कताई मिल का भारी-भरकम हूटर गूंजता, पूरे कस्बे की दिनचर्या शुरू हो जाती थी। कामगार अपनी साइकिलें उठाकर मिलगेट की ओर दौड़ पड़ते, चाय-पान की दुकानों पर चूल्हे सुलगने लगते और बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ जाती थी। दिन के अलग-अलग पहरों से लेकर रात की अंतिम पाली तक, यह हूटर केवल समय नहीं बताता था, बल्कि हजारों परिवारों की धड़कन बनकर बजता था।
फिर आया साल 2000। आर्थिक संकट, भारी कर्ज और अनियमितताओं के बोझ तले दबी मिल के गेट पर हमेशा के लिए ताला लटक गया। मशीनों के पहिये थमे तो वह जाने-पहचाने वाला हूटर भी सदा के लिए खामोश हो गया। एक झटके में सैकड़ों घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए, बाजार वीरान हुए और कंपिल की आर्थिक रीढ़ टूट गई। पिछले 26 वर्षों से यह 82 एकड़ का विशाल परिसर केवल झाड़ियों और खंडहरों का ठिकाना बना हुआ था, जो अपने पुराने वैभव के आंसू बहा रहा था लेकिन अब उस ढाई दशक पुराने सन्नाटे को चीरकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है।
351 करोड़ की जमीन, 100 नई फैक्ट्रियां और नई उम्मीद
प्रदेश सरकार की दूरगामी पहल के बाद इस वीरान जमीन पर जिंदगी फिर से मुस्कुराने को तैयार है। कायमगंज तहसील के कुंवरपुर खास गांव में स्थित कंपिल कताई मिल की 33.1720 हेक्टेयर (लगभग 82.15 एकड़) जमीन बीते सोमवार को आधिकारिक रूप से उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को निःशुल्क हस्तांतरित कर दी गई है।
कायमगंज तहसील स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ के अनुपालन अधिकारी सुबोध तिवारी और यूपीसीडा के प्रबंधक आशीष सिंह तोमर की मौजूदगी में हस्तांतरण की विधिक प्रक्रिया पूरी की गई। सब-रजिस्ट्रार पीतम सिंह के मुताबिक, हस्तांतरित भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य 351 करोड़ 85 लाख 34 हजार 800 रुपये आंका गया है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए शासन ने इस पर देय 24.62 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क और 3.51 करोड़ रुपये के निबंधन शुल्क को पूरी तरह माफ कर दिया। इस प्रकार कुल 28.13 करोड़ रुपये की सरकारी छूट के साथ यह जमीन यूपीसीडा के सुपुर्द की गई। एसडीएम अभिषेक वर्मा का कहना है कि लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी इस जमीन का यूपीसीडा को मिलना जिले के आर्थिक परिदृश्य के लिए बड़ा मोड़ साबित होगा। नई विनिर्माण इकाइयां आने से क्षेत्र में निवेश की रफ्तार तेज होगी।
यूपीसीडा ने अब इस वीरान पड़े भूखंड को आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में तब्दील करने का खाका खींच लिया है। पुराने जर्जर ढांचे हटाकर जमीन के समतलीकरण का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के मुताबिक, यहां लगभग 100 नई औद्योगिक इकाइयां बसाई जाएंगी। चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली, पानी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ निवेशकों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे।
हजारों युवाओं को मिलेगा आजीविका का सहारा
इस कायाकल्प का सबसे भावुक और अहम पहलू है स्थानीय युवाओं के चेहरे पर लौटी उम्मीद। अनुमान है कि 100 नई इकाइयां स्थापित होने से क्षेत्र के करीब 10,000 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसका असर केवल कंपिल तक सीमित नहीं रहेगा; बल्कि फर्रुखाबाद सहित आसपास के जिलों के उन हजारों युवाओं को अब रोजगार की तलाश में दिल्ली या गुजरात जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। फैक्ट्रियां लगने से न केवल कामगारों को नौकरी मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग, निर्माण सामग्री और छोटे ढाबों-दुकानों का एक नया आर्थिक चक्र जन्म लेगा। कस्बे के बुजुर्ग आज भी मिल के उस सुनहरे दौर को याद कर भावुक हो उठते हैं, जबकि नई पीढ़ी के युवाओं की आंखें आने वाले सुनहरे कल के सपने संजो रही हैं। कंपिल अब अपने उस खोए हुए गौरव को पाने की दहलीज पर खड़ा है, जहां बहुत जल्द मशीनों की गूंज एक बार फिर तरक्की और खुशहाली का नया राग छेड़ेगी।




