किसानों के दर्द को समझने वाली जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर, जनता के बीच बनीं भरोसे का चेहरा
- अफसरशाही की बंद दीवारों से बाहर निकलकर गांवों की पगडंडियों तक पहुंचती हैं डीएम
- खेत-खलिहानों में किसानों से सीधा संवाद
- सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर
फर्रुखाबाद। प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने, बैठकों में निर्देश देने और कार्यालयों में बैठकर समीक्षा करने तक सीमित नहीं होती। एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की असली पहचान तब बनती है, जब वह सत्ता और व्यवस्था की दूरी को कम करके सीधे आम आदमी के बीच पहुंचे, किसान के खेत की मेड़ पर खड़े होकर उसकी परेशानी सुने और गांव के गरीब परिवार की आंखों में छिपी उम्मीद को समझने का प्रयास करे।
फर्रुखाबाद की जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली को लेकर इसी तरह की चर्चा सामने आती है। गांवों, किसानों और आम नागरिकों से सीधे संवाद तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर उनकी सक्रियता को लेकर प्रशासनिक हलकों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दें, यही किसी भी जनपद प्रशासन की सबसे बड़ी कसौटी है।
खेत में पहुंचकर समझती हैं अन्नदाता की परेशानी
किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उसकी मेहनत से खेतों में फसल लहलहाती है और पूरे समाज का पेट भरता है, लेकिन जब वही किसान अपनी समस्या लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होता है, तब प्रशासन की संवेदनशीलता की असली परीक्षा होती है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली में ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने का संदेश दिखाई देता है। खेत-खलिहानों तक पहुंचकर किसानों से संवाद करना और उनकी समस्याओं को समझना प्रशासन को जनता के करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
किसान को सिंचाई, खाद, बीज, बिजली, फसल खरीद, मुआवजे और सरकारी सहायता से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का समाधान केवल आदेश जारी करने से नहीं, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति समझने से संभव है।
डीएम दरबार में आम आदमी की उम्मीद
किसी भी जिले के जिलाधिकारी का कार्यालय आम जनता के लिए न्याय और समाधान की उम्मीद का केंद्र होता है। फर्रुखाबाद में जिलाधिकारी से अपनी समस्या रखने की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले लोगों के लिए जनसुनवाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
जनता की अपेक्षा है कि गरीब, किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग और जरूरतमंद व्यक्ति अपनी बात बिना किसी भय और झिझक के प्रशासन तक पहुंचा सके। जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी यही है कि शिकायत केवल कागजों में दर्ज होकर न रह जाए, बल्कि उसका वास्तविक और समयबद्ध निस्तारण हो।
जनता के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि अधिकारी तक उसकी आवाज पहुंचे और उसे अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।
गांवों के विकास पर विशेष नजर
फर्रुखाबाद की पहचान कृषि प्रधान जनपद के रूप में है। यहां की बड़ी आबादी की आजीविका खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। ऐसे में ग्रामीण विकास, सड़क, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषय प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होना आवश्यक है।
सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना भी जिलाधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। पेंशन, आवास, राशन, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, ग्रामीण विकास और महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता तथा पात्रता के आधार पर लाभार्थियों का चयन आम जनता के जीवन में सीधा बदलाव ला सकता है।
डॉ. अंकुर लाठर के नेतृत्व में जनपद प्रशासन के सामने भी यही चुनौती और अवसर है कि योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचे तथा किसी भी जरूरतमंद को बिचौलियों या अनावश्यक प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े।
एक जिलाधिकारी के पास अधिकार होते हैं, लेकिन उन अधिकारों का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका इस्तेमाल जनता की परेशानियां दूर करने के लिए किया जाए। जनता को ऐसा प्रशासन चाहिए जो उसकी बात सुने, समस्याओं को समझे और समाधान की जिम्मेदारी भी ले।
फर्रुखाबाद की जनता की अपेक्षाएं भी डॉ. अंकुर लाठर से कुछ ऐसी ही हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हों, गरीबों को योजनाओं का लाभ मिले, गांवों में विकास कार्य हों और सरकारी कार्यालयों में आम आदमी का सम्मान सुरक्षित रहे।
प्रशासनिक पद अस्थायी होते हैं। अधिकारी आते हैं और स्थानांतरित होकर चले जाते हैं, लेकिन उनके कार्यों की याद जनता के मन में लंबे समय तक रहती है। किसी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि उसके कार्यालय में कितनी बैठकें हुईं, बल्कि यह है कि उसके कार्यकाल में कितने जरूरतमंदों की समस्याओं का समाधान हुआ।
डॉ. अंकुर लाठर के सामने फर्रुखाबाद जैसे कृषि प्रधान जनपद की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का महत्वपूर्ण दायित्व है। किसानों के खेतों से लेकर गरीब की झोपड़ी तक प्रशासन की पहुंच, शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण और विकास योजनाओं की पारदर्शी निगरानी ही उनकी कार्यशैली को और अधिक सार्थक बना सकती है।
क्योंकि जनता को ऐसा जिलाधिकारी चाहिए जो केवल कलेक्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर जिले को न देखे, बल्कि खेत की मेड़ पर खड़े होकर किसान का दर्द भी महसूस करे।
आखिरकार प्रशासन की असली पहचान बड़े-बड़े सरकारी भवनों से नहीं, बल्कि उस आम आदमी की मुस्कान से होती है, जिसकी समस्या का समाधान समय पर हो जाता है।





