- पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की शिकायत

- श्यामजी सिंह को छोड़कर प्रशांत पांडे को चालक बताने पर उठाए सवाल

बाराबंकी। रामसनेहीघाट थाना क्षेत्र में 1 नवंबर को लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में चार युवकों की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। हादसे के बाद बाराबंकी पुलिस की कार्रवाई पर पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने हादसे के बाद मौके से पकड़े गए चालक को छोड़ दिया और अब दूसरे व्यक्ति को वाहन चालक बताकर कार्रवाई कर रही है।

पीड़ित परिवार के मुताबिक, हादसे के बाद पुलिस ने सबसे पहले श्यामजी सिंह को पकड़ा था। परिवार का दावा है कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के सामने श्यामजी सिंह को चालक के रूप में पकड़ा गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे छोड़ दिया। अब पुलिस की ओर से प्रशांत पांडे को वाहन चालक बताया जा रहा है। इस बदलाव को लेकर परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

मृतकों के परिजनों ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। परिवार का आरोप है कि जिस व्यक्ति को हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसे छोड़ दिया गया। परिजनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और वास्तविक चालक की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर संदेह जताते हुए बाराबंकी पुलिस को जांच से हटाने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि जब पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और बाद में सामने आए चालक के नाम में अंतर है तो निष्पक्ष जांच के लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ स्तर के अधिकारी से जांच कराई जानी चाहिए।

चार युवकों की मौत से जुड़े इस मामले में अब कई सवाल उठ रहे हैं। यदि श्यामजी सिंह को शुरुआत में पकड़ा गया था तो बाद में उसे क्यों छोड़ा गया? प्रशांत पांडे को चालक बताने का आधार क्या है? क्या पुलिस के पास चालक की पहचान से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य हैं? शुरुआती कार्रवाई और बाद की कार्रवाई में अंतर क्यों आया?

फिलहाल ये सभी सवाल पीड़ित परिवार की शिकायत और आरोपों के आधार पर उठाए जा रहे हैं। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और चालक की पहचान से जुड़े साक्ष्य सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

चार युवकों की मौत के इस मामले में परिजन अब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस के उच्चाधिकारी शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं।