लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता में सोमवार सुबह मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बाउंड्री वॉल और गाड़ी खड़ी करने को लेकर शुरू हुई कहासुनी के बाद ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना सामने आई। गोली लगने से शिवाजी तिवारी, उनके बेटे सुयश तिवारी और शिवाजी के भाई शंभू तिवारी की मौत हो गई। घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल भिजवाया, जहां तीनों को मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी ऋषभ शुक्ला को कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए असलहे के साथ पकड़ लिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, नौबस्ता में एक बरगद के पेड़ के आसपास बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि इस स्थान पर हर साल वट सावित्री की पूजा होती है। नगर निगम की ओर से सभासद के माध्यम से करीब एक महीने से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। आरोप है कि ऋषभ शुक्ला और उसके परिजन निर्माण का विरोध कर रहे थे। इसी बात को लेकर पहले भी विवाद हुआ था, लेकिन सभासद के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 10:40 बजे शंभू तिवारी बरगद के पेड़ के पास बैठकर पूजा कर रहे थे। इसी दौरान ऋषभ शुक्ला वहां पहुंचा और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के अन्य लोग भी मौके पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि इसी दौरान ऋषभ के चाचा राजेश शुक्ला ने लाठी से वार किया। इसके बाद ऋषभ घर से पिस्टल लेकर आया और कथित तौर पर कई राउंड फायरिंग कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 10 से 12 गोलियां चलाई गईं। हालांकि, घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के अनुसार, घटना के पीछे गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुआ विवाद भी सामने आया है। डीसीपी वेस्ट जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नौबस्ता में ऋषभ शुक्ला और उसके पड़ोसी शिवाजी तिवारी के बीच कहासुनी हुई थी। विवाद बढ़ने पर फायरिंग की गई, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस अब विवाद की वास्तविक वजह और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
घटना के दौरान सिपाही कार्तिक की भूमिका भी चर्चा में रही। मिली जानकारी के अनुसार, सिपाही कार्तिक ने मौके पर पहुंचकर आरोपी ऋषभ शुक्ला को असलहे सहित पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि सिपाही सूचना मिलने पर बिना हथियार के मौके पर पहुंचा था और उसने दौड़कर आरोपी को दबोच लिया। हालांकि, इस घटनाक्रम के सभी विवरणों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस के बयान से की जानी चाहिए। आरोपी को पकड़ने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस अब बरामद पिस्टल के संबंध में भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि असलहा लाइसेंसी है या अवैध। यदि असलहे का लाइसेंस है, तो उसके दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। इसके साथ ही पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने और विवाद की पृष्ठभूमि का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने तीन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शिवाजी तिवारी बिजली विभाग के शक्ति भवन से स्टेनो पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका 30 वर्षीय बेटा सुयश तिवारी नौबस्ता में घर के पास इलेक्ट्रिक की दुकान चलाता था। वह शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों में लाइट लगाने का ठेका भी लेता था। परिवार के अनुसार, सुयश का जनेऊ संस्कार 20 नवंबर, तिलक 21 नवंबर और विवाह पांच दिसंबर को होना तय था। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन घटना के बाद खुशियों का माहौल मातम में बदल गया।
शंभू तिवारी, शिवाजी तिवारी के भाई थे और लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत थे। परिवार की जानकारी के अनुसार, शिवाजी की पत्नी उषा हैं और सुयश उनका इकलौता बेटा था। वहीं, शंभू तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी और बेटी सुमेधा हैं। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

