लखनऊ। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के इतिहास विभाग की ओर से ‘महाकाव्य के रूप में वाल्मीकि रामायण: ऐतिहासिक विमर्श’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण में हुए इस कार्यक्रम में आईजी अमित वर्मा ने वाल्मीकि रामायण के कालक्रम, ऐतिहासिक संदर्भों और इतिहासलेखन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का उद्देश्य वाल्मीकि रामायण को केवल धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथ के रूप में ही नहीं, बल्कि इतिहास के अध्ययन और विमर्श के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में समझना भी रहा। व्याख्यान में रामायण के कथानक, उसकी रचना के काल और उसमें वर्णित घटनाओं के ऐतिहासिक अध्ययन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

आईजी अमित वर्मा ने रामायण के कालक्रम और इतिहासलेखन से जुड़े पहलुओं पर विचार रखते हुए इस महाकाव्य के अध्ययन के विभिन्न दृष्टिकोणों की ओर ध्यान आकर्षित किया। ऐसे विमर्श में साहित्यिक परंपराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और उपलब्ध स्रोतों के आधार पर किसी प्राचीन ग्रंथ को समझने का प्रयास किया जाता है।

विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने वाल्मीकि रामायण के अध्ययन को अकादमिक चर्चा के केंद्र में लाने का अवसर प्रदान किया। वाल्मीकि जयंती के मौके पर हुए इस व्याख्यान के माध्यम से महाकाव्य के साहित्यिक महत्व के साथ-साथ उसके ऐतिहासिक पक्ष पर भी विचार-विमर्श किया गया।